Friday, 25 March 2016

भारतीय संस्कृति आध्यात्मिक विचार सम्पदा  से ओत प्रोत है -------प्राचीन काल में भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था !यहां सेकंडों नदियां बहती थी!



1 और हिमालय ,विंध्याचल जैसे पहाड़ तो देश में हैं ही ! नदियां जरूर बहुत सी लुप्त हो गयी हैं ! और गंगा ,जमुना जैसी पवित्र नदियों का जल भी प्रदूषित हो गया है ! इस समय खनिजों की बेशुमार खुदाई से बालू और पहाड़ियों का भी नाश हो रहा है ! ब्रक्छों की अवैध कटाई से जंगलों का भी विनाश हो रहा है आबादी का दबाब भी अनावश्यक रूप से बढ़ रहा है ! इन सब कारणों से पर्यावरण की विकराल समस्या खड़ी हो गयी है ! इस सबके बाबजूद भी जैसा की विनोबा जी ने कहा है कि भारत में जो विचार सम्पदा है वह अदिद्वतीय है ! बे कहते थे कि बे यह बात अभिमान से नहीं कहते थे अगर बे किसी और देश में भी जन्मे होते  तो भी बे निष्पक्छपाती होकर यही कहते कि भारत का विचार वैभव अद्द्वतीय  है ! भारत की बुनियादी वस्तु आध्यात्मिक विचार सम्पदा है भारत में वैदिक ऋषियों से लेकर आज तक आध्यात्म की एक अखण्ड परंपरा चली आरही है ! दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं हैं जहां अध्यात्म की ऐसी अखण्ड अनादि परंपरा हो ! भाषाएँ बदली बहुत से अपभ्रंश भी हुए किन्तु यहाँ की ज्ञान परंपरा खंडित नहीं हुई 1 यास्काचार्य ने कहा सनातनो नित्य नूतन     ----------ऐसी हमारी नित्य नूतन संस्कृति है ! हमारे भीतर कोई शाश्वत आध्यात्मिक ऋषिओं द्वारा प्रणीत शक्ति है जो बदलती नहीं है ! इसिलए स्थल काल के भेदों के बाद भी सांस्कृतिक एकता के दर्शन होते हैं ! जो दर्शन काशी में होता है वही रामेश्वरम में भी होता है ! हमारे जीवन का ढांचा बदला फिर भी हमारी आतंरिक एकता कायम ही रही -------यूनान ,रोम ,मिस्र ,मिट गए  जहाँ से कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी ! यह कुछ क्या है ?प्राचीन कल से ही भारत के लोग आध्यात्मिक सन्देश विश्व भर में पहुँचाते रहे हैं  !चीन जापान अदि देशों में बुद्ध धर्म पहुंचा ! ज्ञान की विविध शाखाओं का विचार और विकास हुआ ------गणित शास्त्र की शोध हुई ,व्योहार  का अध्ययन हुआ, वेदीक्शास्त्र चला ,और वनस्पति शास्त्र  विकसित हुआ ,ज्योतिष शास्त्र भी विकसित हुआ , बड़े बड़े महाकाव्य लिखे गए अनेक प्रकार के सुक्छम तत्तवज्ञान के विचार तब  निकले जब पृथवी के अन्यदेश ज्ञान के अन्धकार में डूबे हुए थे ! पूर्व के बुद्धिमान वहां पहुंचे इसका उल्लेख बाइबिल में है ! किन्तु कुछ काल ऐसा निकला जब भारत सोता हुआ मालूम पड़ा ! किन्तु अब वह फिर से जाग रहा है ! रामकृष्ण परम हंस ,रवींद्र नाथ टैगोर ,अरविन्द घोष ,विवेकानंद ,लोकमान्य तिलक महात्मा गांधी ,आचार्य विनोबा भावे अदि और इस श्रृंखला में अनेकों आध्यात्मिक ऋषि मुनि और ज्ञात अज्ञात सहस्त्रों आध्यात्मिक साधक भारत की पवित्र धरा धाम पर आध्यात्मिक चेतन  जाग्रत करने  के कार्य में संलग्न है !भारत फिर से जाग रहा है !

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