महान वैज्ञानिक अल्वर्ट आयनिस्टीन सिर्फ एक वैज्ञानिक ही नहीं थे ,वे एक
आत्मशक्ति संपन्न महामानव भी थे ,बे गांधीजी के बहुत बड़े प्रसंसक थे!
उन्होंने २७ सितम्बर १९३१ को गांधीजी को पत्र में लिखा था ,श्रद्धेय श्री
गांधी , में यह पत्र आपके मित्र द्वारा भेज रहा हूँ ! आपने अपने कार्योँ से
यह दिखा दिया है की बिना हिंसा के ऐसे लोगों के विरुद्ध सफलता पाना संभव
है जिन्होंने हिंसा का तरीका नहीं त्यागा है !हम आशा कर सकते हैं कि आपका
उदाहरण आपके देश की सीमा के बाहर फैलेगा !और एक अंतर्राष्ट्रीय
आदर्श स्थापित करेगा ,जिसका सभी आदर करेंगे ,जिसके द्वारा सभी निर्णय लिए
जायेंगे तथा जो सामरिक झगड़ोँ को बिस्थापित करेगा ! गहन श्रद्धा और आदर के
साथ आपका --अायेिनस्टीन! मुझे आशा है की में एक दिन आपसे मिल सकूंगा !
गांधी जी ने इस पात्र के उत्तर में लिखा था !लंदन १८ अक्टूबर १९३१ प्रिय
मित्र , सुंदरम के हाथ आपका सुन्दर पत्र पाकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई !यह
मेरे लिए बड़ी तसल्ली की बात है कि आपकी दृष्टि में मेरा काम सराहनीय है 1
मेरी हार्दिक अभिलाषा है कि में आपसे भेंट कर सकूँ और यह भी मेरे आश्रम
भारत में,----------भवदीय, एम के गांधी! गांधी जी की मृत्यु पर आइन्स्टीन
ने कहा था कि आने वाली पीढ़ियां मुश्किल से यह विश्वास करेंगी की हाड़ माष से
युक्त कोई गांधी जी जैसा व्यक्ति भी इस पृथ्वी पर था !
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