सरदार भगतसिंह से युवाओं को क्या सीखना चाहिए ?--(१ ) सिद्धान्त के प्रति समर्पित जीवन ज़ीने की कला ----- भगत सिंह मार्क्सवाद से प्रभावित थे !और उसको समाज के आमूलचूल परिवर्तन के लिए नवीन क्रांतिकारी उपाय के रूप में स्वीकार करते थे !बे किसी भी व्यक्ति के अंध समर्थक और अंध भक्त नहीं थे !उनके समय में गांधीजी ,नेहरूजी और सुभाषचंद्र बॉस भारत के राजनैतिक छितिज पर छाये हुए थे !बे इन तीनो महापुरुषों में सर्वाधिक प्रभावित नेहरूजी से थे !उन्होंने अपनी सहादत के ३साल पूर्व एक लेख में सुभाषचंद्र बॉस को भावुक बंगाली कहा था !और बे सुभाष बोस के राष्ट्रवाद को भी स्वीकार नहीं करते थे !बे नेहरूजी को युगांतरकारी मानते थे !और उनकी समाजवादी सोच के समर्थक थे ! जो युवा भगत सिंह को अपना आदर्श मानते हैं !उन्हें भगत सिंह के द्वारा लिखित उनके विचारों का अध्ययन ,मनन और चिंतन करना चाहिए !किसी राजनेता का गुण गान नहीं करना चाहिए !भगत सिंह के समय में सभी नेताओं में देश को स्वतंत्र कराने की धुन सबार थी !बे अपने अपने तरीकों ,साधनों ,सामर्थ्य और विचारों से देश की आजादी के लिए तन मन ,धन ,और जीवन समर्पितकरने के लिए तैयार थे !जिस प्रकार मतविभिन्नता मानवीय स्वाभाव में स्वाभाविक रूप में विद्यमान होती हैं !वह उनमे भी थी !किन्तु देश की आजादी के लिए बे एकमत थे !इसीलिए युवाओं को अपना समय इस व्यर्थ विवाद में नष्ट नहीं करना चाहिए कि देश की आजादी अहिंसा से प्राप्त हुयी या हिंसा हिंसा से ? इस पर भी समय शक्ति को वर्वाद नहीं करना चाहिए कि कौन बड़ा देश भक्त था ! देश की आजादी के यज्ञ में जिन लोगों ने अपनी सामर्थ्य और शक्ति के अनुसार आहुतियां डाली थी बे सभी स्मरणीय और आदर के पात्र हैं !आजादी के बाद नेताओं की दृष्टि ,और विचार ,में परिवर्तन हुआ है ! लोकतंत्र का ढांचा खड़ा हो गया है !किन्तु उसमे अभी लोकतंत्र की मूलबृत्ति उत्पन्ननही हुई है ! लोकतंत्र की मूलभावना को लोकतंत्र में स्थापित करने के लिए युवाओं को काम करनाचाहिए ! इसके लिए जो आवश्यक त्याग ,संयम ,अध्ययन अदि की आवश्यकता हो उसको प्राप्त कर अपने जीवन में उतारना चाइये !अब देश आजाद है !देश में संविधान है !और संवैधानिक व्यबस्था है !इसिलए युवाओं को संवैधानिक व्यबस्था के अंतर्गत ही लोकतंत्र की मूल भाबना के लिए कार्य करना चाहिए !अराजकता किसी भी स्थिति में स्वीकृत नहीं की जा सकती है !अराजकता से रचनाधर्मिता का नाश हो जाता है !और भारत ऐसे विशाल देश में अराजकता से हानि अधिक होगी लाभ लगभग नहीं के बराबर होगा !भगत सिंह की देश भक्ति और आजादी के लिए सहादत को ध्यान में रख कर उनकी जीवन पद्धति का अनुकरण और अनुसरण ना कर उनकी देशभक्ति से समाजनिर्माण ,और लोकतंत्र को सही रूप में स्थापित करने के लिए युवाओं को अपने स्वार्थ ,सुख प्राप्ति की भावना का त्यागकर और किसी भी राजनेता या राजनैतिक दल का अन्ध भक्त ना बनकर देश हित के लिए काम करना चाहिए !
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