व्योपारी अपनी आय व्यय का चिटठा वर्ष के अंत में बनाता है !फिर अगले वर्ष
के लिए ऐसी व्यबस्था का निर्माण करता है 1 जिस से आय में बृद्धि हो और
नुकसान यदि गत वर्ष में हुआ हो तो उसकी भी भरपाई हो जाए !आज कल देश में
बहुत से धार्मिक संगठन सतबृत्ति प्रसार के कार्योँ में संलग्न दिखाई देते
हैं ! किन्तु जैसा अनुभव में आ रहा है! कोई खास सुधार दिखाई नहीं देता है
!बल्कि इन संगठनो में भी दूषित चित्त के लोगों का वाहुल्य मालूम पड़ता है
!इसलिए सुधार की जगह बिगाड़ के दर्शन भी होते है !जब धार्मिक
मंचों से त्याग तपस्या ईश्वर भक्ति सादा पवित्र जीवन के प्रवचन होते हैं
!किन्तु प्रवचन करने बालों के जीवन में उसका दर्शन नहीं होता है !बल्कि
विपरीत भोग मय जीवन का आचरण दिखाई देता है ! तब ऐसे संगठनो में ऐसे लोगों
का वर्चस्व बढ़ जाता है जिनकी कथनी आदर्श युक्त किन्तु करनी कपट युक्त होती
है !इस से ऐसे लोगों का जमघट लगने लगता है जो अपने कर्तव्य कर्म का निर्वहन
तो करते नहीं है !सभी प्रकार के गलत काम करते हैं ! और इन धार्मिक संगठनो
को अपने अन्याय भ्रष्ट आचरण से उपार्जित धन से इन संगठनो के गुरुओं को
दान दक्छिणा देकर पाप से अपने आप को मुक्त समझ लेते हैं ! और फिर पाप कर्म
में लिप्त हो जाते हैं !इस समय ऐसे धार्मिक आयोजनो की भरमार दिखाई दे रही
है १इसिलिये जो वास्तव में सदमार्ग के पथिक हैं ! और सदाचार के अनुरागी
हैं !और भगवन के भक्त हैं 1 उन्हें सिर्फ कथनी से ही प्रभावित नहीं होना
चाहिए !करनी देख कर ही अपनी राय कायम करना चाहिए 1 किन्तु ईश्वर की कृपा और
आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए जितना हो सके अपना आचरण पवित्र करने का
प्रयत्न करना चाहिए और जहाँ कहीं भी ऐसे ईश्वर भक्तों आचार्यों का दर्शन
सत्संग प्राप्त हो उनका संग करके वास्तविक ईश्वर भक्ति प्राप्त करने का
प्रयत्न करना चाहिए !
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