Wednesday, 23 March 2016

आजकल धर्मनिरपेक्छ्ता के नाम पर विद्द्यार्थिओं को सूर्यनमस्कार योग आदि विद्दायों को पढने लिखने और सीखने का विरोध मुसलमानो द्वारा किया जा रहा है! इन दिनों विद्यार्थिओं को आधयात्मिक साहित्य नहीं पढ़ाया जाता है ! भारतीय भासाओं का सर्वोत्तम साहित्य आध्यात्मिक साहित्य है !अगर धर्म निरपेक्छ राज्य के नाम पर वह कुल का कुल साहित्य निषिद्ध हो जाय ! तो विद्द्यार्थिओं में नैतिकता कैसे पैदा होगी? और उनका शारीरिक और मानसिक विकास कैसे होगा !सिखों में करीब करीब हर लड़का जपु जी को पढता है ! लेकिन इन दिनों मुसलमानो के विरोध के कारण जपु जी की तालीम स्कूलों में नहीं दी जा सकती है ! जपु जी में कहा गया है कुल दुनिया हमारी ही जमात है ! सबके साथ समान भाव रखने की इस से बेहतर तालीम और दूसरी क्या होगी ?रामायण कुरान गीता जपु जी कुछ भी नहीं पढ़ाया जायेगा तो विद्द्यार्थी आत्मज्ञान से वंचित रह जाएंगे ! जो मुसलमान सूर्य नमस्कार का यह कह कर विरोध कर रहे हैं कि इस्लाम में सूर्य नमस्कार का विधान नहीं है ! हिन्दू धर्म में भी सूर्य को नमस्कार करने की बात नहीं कही गयी है ! किन्तु सूर्य में जो जीवन देने वाला स्फूर्ति शक्ति और ज्ञान प्रदान करने वाला जो प्रकाश है 1 वह सूर्य का प्रकाश नहीं है ! वह अल्लाह का प्रकाश है !भगवान कृष्णा ने गीता में अध्याय १५ नश्लोक १२ में कहा है 1 कि सूर्य को प्राप्त हुआ जो प्रकाश और तेज संपूर्ण संसार को प्रकाशित करता है ! और जो तेज चद्रमा में है 1 तथा जो तेज अग्नि में है 1 यह तेज और प्रकाश परमात्मा का है !यह परमात्मा के प्रकाश से जीवन दायिनी शक्ति राजस्थान या मध्यप्रदेश सरकार ने नहीं दी है 1यह सूर्य नमस्कार ऋषिओं के द्वारा दिया गया मानव जाति के लिए अनुपम उपहार है 1 यदि मुस्लिम अपने बच्चों को इस अनुपम शक्ति दायी उपहार से वंचित रखना चाहते हैं ! तो बो सूर्य नमस्कार में शामिल न हों ! किन्तु उनके लिए धर्म निर्पेक्छ्ता के नाम पर भारतीय विद्द्यर्थिओं को भगवान के इस दिव्य आशीर्वाद से वंचित नहीं रखा जा सकता है !

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