जल
दिवस----भारत वर्ष में अत्यंत प्राचीन काल से ब्रक्छा रोपण और तालाब
खुदवाने को पुण्य कार्य माना जाता रहा है ! महाभारत में कहा गया है कि
तालाब कुवाँ और ब्रक्छ लगाने वाला मानव दीर्घ आयु सौभाग्य तथा मृत्यु के
पश्चात शुभ गति प्राप्त कर लेता है !! इसलिए राजा लोग राज्यों में बाग
बगीचे लगाते थे ! और बड़े बड़े तालाब खुदवाते थे ! तथा जंगलों का विकास करते
थे ! परिणाम स्वरुप भारत भूमि सभी प्रकार के फलदार ब्रक्छों से भरी हुई थी 1
और तालाबों की देश में भरमार थी ! तथा नदियां पवित्र शुद्ध जलों
से लबा लब भरी रहती थी ! किन्तु स्वतंत्र भारत में बनो का इतनी तेजी से
विनाश हुआ कि जमीन की सुंदरता ही नष्ट हो गयी ! और वसंत होली आदि त्यौहार
जिनमे मौसम के कारण स्वाभाविक उमंग और मस्ती आती थी बे अब सिर्फ शब्दों में
सिमट कर रह गए हैं ! और तालाबों का तो यह हाल हो गया है कि देश के लाखों
तालाब भू मफिओं और दबंग किसानो ने नष्ट कर दिए हैं ! जंगलों का विनाश
राजनेताओं ने खुद और अपने संरक्छण में अधिकारिओं के सहयोग और मिली भगत से
किया और कराया है 1 और अभी भी जारी है ! सारी नदिओं का जल प्रदूषित हो गया
है ! जल पुरुष राजेन्द्र सिंह का कहना है कि देश में कोई नदी बची ही नहीं
है! ! वातावरण बुरी तरह प्रदूषित हो गया है ! और दुःख की बात यह है कि यह
बर्बादी नेताओं और अधिकारिओं की साजिस और सहयोग से हो रही है ! और इस
पवित्र भूमि भारत को इसके उत्तम जल स्रोतों और जंगलों का विनाश तीव्र गति
से किया जा रहा है! जल दिवस को नेता अधिकारी भू मफिओं से तालाब जल ज़मीन और
जंगल मुक्ति के रूप में मनाया जाना चाहिए ---नरोत्तम स्वामी
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