Monday, 14 March 2016

गांधी जी की प्रतिमा का अनावरण आज लंदन के पार्लियामेंट स्कवायर में किया गया और उसको महान प्रेरणा का सम्मान कहा गया भारत में भले ही गांधी जी के विषय में अपमानजनक शब्दोँ का प्रयोग किया जाता है और उनकी विफलता का भी तथाकथित बुद्धि जीवी बड़े मनोयोग से वर्णन करते हैं यद्द्पि गांधी जी को स्वतंत्र भारत में कुल ५ महीने ही जीवित रहने दिया गया इसलिए वह अपने स्वप्नों के भारत का निर्माण न ही कर सके किन्तु गांधीजी अपने जीवन काल में भी और मृत्यु के बाद भी अहिंसक क्रांति के एक अग्र दूत बने रहे और उन्होंने अपनी आत्मशक्ति से उस समय भी और मृत्यु के बाद भी प्रभावित किया है और कर रहे है अल्वर्ट आयेंस्टीन ने २७ सितम्बर १९३१ में अपने पत्र में लिखा था की आपने अपने कार्योँ से यह दिखा दिया है की बिना हिंसा के ऐसे लोगों के विरुद्ध सफलता पाना संभव है जिन्होंने हिंसा का तरीका नहीं त्यागा है जार्ज बर्नार्ड शा जब १९३१ में गांधी जी से मिलने आये थे तब उन्होंने कहा था गांधी की लड़ाई अंग्रेजों के विरद्ध खलनायक की नहीं एक अहिंसक संत का अहिंसक युद्ध है दलाई लामा ने १९८९ में नोबल पुरुष्कार ग्रहण करते समय कहा था में इस पुरूस्कार को उस महान संत महात्मा गांधी के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में ग्रहण करता हूँ अन्य नोबल पुरूस्कार से सम्मानित लोगों में जिन्होंने सार्वजानिक रूप से अपने ऊपर गांधीजी के प्रभाव को स्वीकार किया है अफ्रीका के बिशप डेसमंड टूटू नेल्सन मंडेला अर्जेन्टीना के अडोल्फो पेरेज आदि हैं जिन्होंने गांधीजी को मानवता के इतिहास में सबसे महान व्यक्तिओं में से एक कहा था मदर टेरेसा वर्मा की सुई की कीनिया के बंगारी मथई अमर्त्यसेन अमेरिका के पूर्व राष्ट्र पति जिमी कार्टर और वर्तमान राष्ट्रपति ओबामा ने नोबल शांति पुरुष्कार प्राप्त करते समय कहा था गांधी जी की अहिंसा की नैतिक शक्ति का जीवन्त प्रमाण आपके समक्छ मै खड़ा हूँ गांधी जी की मृत्यु के ६० साल के अंदर ही १३० से अधिक देशों ने अपने को आजाद किया तथा २० से अधिक देशों ने दमनकारी जातीय और फासिस्ट शासकोँ से अहिंसक तरीकोँ से छूट कारा पाया इन सबने गांधी जी के अहिंसक आंदोलन से प्रेरणा प्राप्त की यद्द्पि गांधी जी की अहिंसक शक्ति आज भी क्रिया शील है सिर्फ उसका प्रभाव भारत में दिखाई नहीं देता है और ना ही भारत उनको अपने आचरण में उतारने को उत्सुक दिखाई देता है क्योँकि गांधी जी का जीवन सत्य प्रेम त्याग शांति और अहिंसा तथा आदर्शनिष्ठ है जबकि आज भारतीय जीवन में छल कपट रिश्वत खोरी कमीशन दलबदल हिंसा स्वार्थ असत्य साम्प्रदायिकता पद प्राप्ति की चेस्टा सभी उचित अनुचित साधनो से संपत्ति इकट्ठी करने की प्रवल आकांछा और आदर्शवाद की बातें और धूर्तता के काम करने की प्रवृत्ति व्याप्त है वहां गांधीजी की कथनी करनी की एकता कहाँ टिक सकती है इसलिए गांधी जी की महान प्रेरणा का न तो हम सम्मान कर सकते हैं और ना ही उसको धारण कर सकते हैं नरोत्तम स्वामी सिविल लाइन्स झाँसी

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