भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण के स्वाभाविक गुण धर्म मन का निग्रह करना ,इन्द्रियों को बश में करना ,धर्म पालन के लिए कष्ट सहन ,बाहर भीतर से शुद्ध रहना दूसरों के अपराधों को छमा करना शरीर ,मन आदि में सरलता रखना ,वेद शाश्त्र आदि का ज्ञान होना ,यज्ञविधि को अनुभव मे लाना तथा परमात्मा का प्रत्यक्छ अनुभव करना आदि बताये हैं ! १८ ( ४२ ) इन सभी आचरणीय गुणों को जीवन में धारण करने के लिए ब्राह्मण आयु ,सत्त्वगुण ,बल ,आरोग्य ,आनंद प्रसन्नता बढ़ाने वाले ,और जीवन पर्यन्त शक्ति और सद्गुण प्रदान करने वाले और ह्रदय को शक्ति प्रदान करने वाले घी दूध सूखे मेवे और फल तथा दुर्गन्ध रहित सब्जियां और सतोगुण की बृद्धि करने वाले भोज्य पदार्थ अल्पमात्रा में संयम पूर्वक ग्रहण करते हैं १७(८) !प्याज लहसुन आदि दुर्गन्ध युक्त पदार्थ हैं ! इनसे सतोगुण का नाश होता है इसीलिए ऐसे सभी खाद्य पदार्थ जो सड़े हुए ,रस रहित ,दुर्गन्धित ,बासी ,जूठे ,और अपवित्र मांश आदि है जो हिंसा और तमोगुण उत्पन्न करते हैं शुद्ध ब्राह्मण उनको नहीं खाते हैं !जो शुद्ध ब्राह्मण है बे ऐसे तमोगुणी भोज्य पदार्थों का स्पर्श तक नहीं करते हैं !प्याज लहसुन ऐसे ही अपवित्र दुर्गन्ध युक्त भोज्य पदार्थ हैं जो शुद्ध और सतोगुणी ब्राह्मणो के लिए वर्जित हैं !
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