आरक्छण देश की ऊर्जा को नष्ट करने का साधन बनता जा रहा है !यह स्वाबलंबन की बृत्ति को नष्ट कर युवाओं में बिना योग्यता के पद और प्रितिष्ठा प्राप्ति का साधन बन गया है !इसीलिए देश की सभी जातियां आरक्छण की मांग कर रही हैं !देश की समझ लकवाग्रस्त हो गयी है !नौकरियां सिर्फ जीविको पार्जन मात्र का साधन नहीं हैं !ना ही विधान सभा ,लोकसभा और मंत्रिपद प्रतिष्ठा प्राप्ति के लिए है !इन सबके साथ जिम्मेदारी का पालन करने की आवश्यकता भी जुडी हुई है !जब नेहरूजी अपने मंत्रिमंडल के साथ दिल्ली में सफाई कर्मचारियों की कालोनी में जहाँ गांधीजी रहते थे ! उनका आशीर्वाद लेने गए थे !तब गांधीजी ने सभी मंत्रियों से कहा था कि तुम सबने काँटों का ताज पहना है !अब तुम्हारी असली परीक्छा होगी !तुम सबको प्रितिष्ठा और राग मोह से रहित होकर जनता की सेवा करनी है !आज लोग इन सभी पदों को लाभ और प्रितिष्ठा प्राप्तिका साधन मान कर इनको येन केनप्रकारेण प्राप्त करने का प्रयत्न करते है !और आरक्छण उनको सबसे सुलभ साधन मालुम पड़ता है !इसीलिए आरक्छण प्राप्ति के लिए बे हिंसा .लूट पाट और बलात्कार ऐसे जघन्य कार्य करने में झिझकते नहीं हैं !जाटों के इस हिंसक आरक्छण ने ऐसा दृश्य उपस्थित कर दिया था !जैसे देश में कोई सरकार और संविधान ही नहीं है !
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