गांधीजी ने गोल मेज परिषद में कहा था भारत के गाओं वस्त्र और भोजन में
स्वाबलंबी हमेशा से रहे हैं किन्तु गुलामी ने उनको गरीवी के गर्त में ढके ल
दिया है महाभारत में उस समय के नगरों गाओं का यथार्थ वर्णन प्रस्तुत किया
गया है आज के बिहार के मगध का राजा जरासंध था जब भगवान श्री कृष्ण अर्जुन
भीम मगध राज्य की और चले तब के रास्ते में पड़ने वाले गाओं नदिओं और
तालाबों का वर्णन करते हुए व्यास ने लिखा है बे पहले पद्मसरोवर पहुंचे फिर
काल कूट पर्वत को लांघ कर गण्डकी महशोन सदानीरा आदि नदिओं को
पार् करते हुए रमणीय सरयू नदी पार करके पुर्बी कौशल प्रदेश में प्रवेश
किया फिर उन्होंने मिथिला में प्रवेश किया फिर सदा गोधन से भरे पूरे जल से
परिपूर्ण सुन्दर बृक्षों से शसोभित गोरथ पर्वत पर पहुँच कर मगध राजधानी को
देखा वहां पशुओं की अधिकता थी जल की भी सदा पूर्ण सुविधा रहती थी रोग
व्याधि से मुक्त था सुन्दर महलों से भरा पूरा यह शहर बड़ा मनोहर प्रतीत होता
था पूरे शहर के इर्द गिर्द बृक्षों के मनोहर बन थे तथा अत्यंत कठोर ब्रत
का पालन करने वाले सिद्धों यतिओं मुनिओं के आश्रम थे यह आनंद प्रद व्यबस्था
राह में पड़ने वाले गाओं नगरों में भी थी और मगध राज धानी में भी थी ऐसे
भारत के निर्माण के लिए पशुओं का बध विशेष तौर पर गो वध जल जंगल जमीन की
रक्षा का उत्तर दायित्व सभी भारतीओं का है इसी से रोग गरीवी पर्यावरण
प्रदुषण से मुक्त भारत का निर्माण होगा
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