नसीरुद्दीन सह का कथन पाकिस्तान के आम मुसलमान की दृष्टि से सही हो सकता है
!क्योँकि मुसलमान यह नहीं चाहता कि हिन्दू मुस्लिम में वैमनष्यता रहे !
किन्तु पाकिस्तानी चरम पंथी मुसलमानो की दृष्टि से जो हिन्दुओं के लिए गहरी
घृणा रखते हैं ! 1 और जो पाकिस्तानी हिन्दुओं पर भीअत्याचार करते हैं ! और
हिंदुस्तान में आतंकवादी भेज कर यहाँ आतंकवादी हमले कराते है ! तथा जिनके
हमलों के कारण यहाँ हजारों निर्दोष लोगों की जाने गयी है !इन तमाम घटनाओं
को देख कर यह कैसे कहा जा सकता है कि हिंदुस्तान
में पाकिस्तान के खिलाफ वैर भाव विकसित किया जा रहा है !नसीरुद्दीन को
पाकिस्तान का बच्चों को पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम भी देखना चाहिए जिसमे
हिन्दुओं के बारे में मुस्लिम बच्चों को असत्य और नफ़रत से भरी बातें सिखाई
जाती हैं !पाकिस्तान के चरमपंथिओं की यह कोशिश है कि मुसमानों में हिन्दुओं
के प्रति इतनी गहरी नफरत पैदा कर दी जाय की कभी सौहाद्र पूर्ण सम्बन्ध
स्थापित ही न होने पाएं !नसीरुद्दीन शाह के मुस्लिम पाकिस्तान के प्रति सहन
भूति का एक कारण और भी हो सकता है कि वह एक मुस्ललमान है !और उनको इस्लाम
का चरम पंथी चेहरा न समझ में आता हो इसलिए उनको लगता हो की पाकिस्तान
हिंदुस्तान का हिमायती है जबकि हिंदुस्तान पाकिस्तान के प्रति वैर भाव रखता
है !इस तरह का विचार व्यक्त करने वाले नसीरुद्दीन पहले मुस्लमान नहीं हैं
!सारे जहाँ से अच्छा लिखने वाले अल्लामा इक़बाल भी बाद में विश्व इस्लाम बाद
के पैरोकार बन गए थे !उन्होंने कहा था !अये आवे मौज गंगा वह दिन है याद
तुझको ,उतरा तेरे किनारे जब कारवां हमारा? !चीनी अरब हमारा हिन्दोस्तान
हमारा ,मुस्लिम हैं हम बतन हैं सारा जहां हमारा ! यही वह ख्वाब है जिसको
प्राप्त करने के लिए मुस्लिम देशों के चरम पंथी और इस्लामिक संगठन और बोको
हराम जैसे संगठन क्रूर हिंसा का खेल खेल रहे हैं !और जो हिंदुस्तान
पाकिस्तान की हर बेजा हरकत को शक्तिशाली होते हुए भी बर्दाश्त कर रहा है
उसको नसीरुद्दीन कहते हैं की हिंदुस्तान में पाकिस्तान के विरुद्ध वैर भाव
बढ़ाया जा रहा है ?
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