कहनी है एक बात हमें इस देश के पहरेदारों से सम्भल के रहना अपनेघर में छिपे हुए गददारों से--------------------- किसी फिल्म का यह गीत कभी मेने सुना था !जिस प्रकार से देश में अच्छी और सच्ची देशभक्ति और राष्ट्रभक्ति की बातें कहने वालों का एक विशाल समूह देश में उमड़ता दिखाई देता है !और उससे अधिक बड़ी संख्या में कर्मछेत्र में ऐसे ही शब्दज्ञानियों और देश में भ्रष्टाचरण और अपने निजी अत्यंत संकुचित स्वार्थों की पूर्ति में संलग्न व्यक्तियों का समूह भी दृष्टिगोचर होरहा है ! इनमे कुछ लोग वैचारिक मतभेदों के कारण आचरण रहित विरोध के स्वर व्यक्त करते देखे जाते हैं !और कुछ लोग व्यक्ति विशेष या विचारधारा विशेष कि अंधभक्ति के कारण बिना जमीनी हकिकसत के समझे अपनी अभिव्यक्ति से सही बातों का भी विरोध करते हैं बर्तमान भारत इस समय कथनी और करनी के भारी अंतर से ग्रस्त होकर भौतिक और आत्मिक दोनों प्रकार की परेशानियों को झेल रहा है !एक ओर ऐसे लोगों का बहुत बढ़ा राजनेताओं का समूह है !जो नित्यनिरन्तर लोकहित की बातें कर सत्ता प्राप्ति के लिए देश में सभी प्रकार की बेईमानियों के क्रियांबन में दिन रात लगे रहते हैं !इस से संसद से लेकर ग्राम सभा तक और नागरिक ब्योपारिक सभी संगठनो में इस राक्छ्सी बृत्ति का पूर्ण संचरण हो गया है !जिन संस्थानों में चुनाव के द्ववारा प्रितिनिधि चुने जाते हैं ऐसी एक भी संस्था नहीं है !जहाँ ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा स्वार्थ और बेईमानी की दासी बनी ना दिखाई देती हो ! दूसरी और चरित्र निर्माण करने वाली शिक्छण संस्थाएं और धार्मिक संस्थाएं हैं !वहां भी त्याग कर्तव्यनिष्ठा तपस्या ,ईश्वरभक्ति आदि की प्रेरणा दायक बातें की जाती हैं ! और उपदेश दिये जाते हैं !महापुरुषों के जीवन से शिक्छा ग्रहणकर देश भक्ति के जवानी जुमले बोले जाते हैं !किन्तु ये ऐसा उपदेशकरने वाले भोग भाव से और भोग सामग्री के उपयोग से ग्रस्त होते हैं !सदाचरण और शिक्छण जोमनुष्यमात्र को अनुशाषित और लोकहित का जीवन जीने का मार्ग प्रसश्त करते थे बे अब इन स्वार्थपोषक लोगों के लिए अन्याय युक्त और अनैतिक आचरण से भोग और एशबर्य प्राप्ति के साधन बनगए हैं !आमजनता को इन लोगों के कारण अतिशय शारीरिक और मानसिक कष्टों को झेलना पड़ रहा है !यह सब यदि इसी प्रकार अबाध गति से चलता रहा !तो भविष्य इन भोग बादी शब्द ज्ञानियों को भी और आमजनता को भारी कष्टों में डाल देगा ! ये सभी लोग बर्तमान समय में देश में गददारों को जन्म देने का काम कर रहे हैं ! इसी कर्तव्य भ्रष्टता के कारण देश की अखंडता और संवेधानिक व्यबस्था को नष्ट करने वाले ऐसे गददारों के समूह भी सक्रिय हैं ! जिसका अभी एक उदाहरण दिल्ली के एक सबसे महत्त्वपूर्ण विश्वविद्यालय में देशविरोधी नारे लगाने वाले लोगों के रूपमे सामने आया है !देश की बिरासत बहुत महान है !सिर्फ उसको शव्दों से आचरण में उतारने की आवश्यकता है !और देशबासियों में यह सामर्थ्य और शक्ति है !कि बे इस देशभक्ति को अपने आचरण में उतारभी सकते हैं ! सिर्फ हम सबको अपने स्वनिर्धारित कर्त्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने की आवश्यकता है !और हम यह करके इन देशके गद्दारों और गद्दारी से मुक्ति पा सकते हैं !
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