देश में सभी स्थानो में राजनीति है इसलिए सभी जगह भृष्टाचार है रावण के देश
मुख थे इसलिए उसकी लंका सोने की थी किन्तु उसका साम्राज्य सिर्फ लंका तक
ही सीमित था इसीलिए भगवान राम को दसमुखी भृष्टाचार को मारकर भृष्टाचार रहित
आदर्श राम राज्य स्थापित करने में सफलता मिल गयी थी किन्तु वर्तमान समय के
भृष्टाचार के करोड़ों मुख हैइसकी लंका हीरों जवाहरातों और राजनैतिक शक्ति
की है और इसका विस्तार विश्व व्यापी है और विश्व के अधिकांश विकास शील
इसकी चपेट में हैं भारत भी विकाश शील देश है इसलिए यहाँ
भी करोड़ों मुख के भृष्टा चार का प्रभाव है वास्तिक स्थिति यह है कि विकास
जनहित के लिए नहीं बल्कि नेताओं अधिकारिओं के हित के लिए किया जाता है
क्योँकि विकास की अधिकांश धन राशि कमीशन और रिश्वत के रूप में बंट जाती है
राजीव गांधी ने कहा था विकास के लिए दिए गए रुपयों में से मात्र २५ पैसे का
कार्य होता है और अब बिहार के मुख्य मंत्री ने कहा है की करोड़ों रूपए की
लागत से बनने वाले पल अरबों रूपए में बनते है मुझे भी कमीशन मिलता है इस
करोड़ों मुख वाले भृष्ट चार को समाप्त करने के लिए अरबों संगठित हाथों की
आवश्यकता है तब इस राक्छस राज भृष्टाचार का अंत हो पायेगा क्योँकि इस
भृष्टाचार का सर नेता है ह्रदय अधिकारी है शरीर कर्मचारी और बिचौलिये है और
इसको प्राण देशवासिओं के कमाया हुआ टैक्स रूप में दियागया धन है इसकी
मृत्यु प्राण रूप में दिए गए धन का सही उपयोग करने पर होगी लेकिन ऐसी
भृष्टाचारविरोधी शक्ति का निर्माण कब और कैसे हो पयेगा ?इसकी खोजभी
भृष्टाचार से पीड़ित लोगों को करनी होगी
No comments:
Post a Comment