Tuesday, 23 February 2016

असत्य के साये में उलझ गया  जे एन यू  विवाद  ----------------------- लोकतंत्र के सफल सञ्चालन के लिए प्रमाणिकता की आवश्यकता है !भारत ने लोकतंत्र का ढांचा तो खड़ा कर दिया !किन्तु अब तक देश में लोकतांत्रिक मन, बुद्धि और चित्त का निर्माण नहीं हो पाया है !इसीलिए लोकतंत्र की मूलभूत आवश्यकता प्रामाणिकता  का जन्म अभी तक नहीं हुआ है !बल्कि जिस प्रमाणिकता ,ईमानदारी  त्याग और तपस्य की भारतीय धरोहर को १००० साल की गुलामी भी समाप्त नहीं कर पायी थी !i
उस प्रमाणिकता का  स्वतंत्र भारत  में तेजी से नाश हो रहा है ! !प्रमुख रूप से लोकतंत्र की व्यबस्था को विधान बनाकर संचालित करने वाले राजनेता और राजनैतिक दल ,कानूनो को पालन कराने वाला प्रशासनिक  तंत्र और कानून के उल्लंघन करने वालों को न्याय के द्वारा दण्डित करने वाला न्याय तंत्र !इन तीन में प्रमाणिकता अभाव क्रमशः बढ़ता  जा रहा है !इन तीनो में प्रमाणिकता के दोष के कारण लोकतांत्रिक  जीवन पद्धति को गति देना वाले  शिक्छण तंत्र ,स्वास्थ्य ,विकास ,व्योपार आदि भी प्रमाणिकता से शून्य हो गए हैं !चूँकि इन सभी व्यबस्थाओं का संचालन नागरिकों के द्वारा ही किया जाता है !इसीलिए इन सभी ब्यवस्थाओं के पतन के कारण नागरिक भी भ्रष्ट और पतित हो गए हैं !
----------------------------------------------शिक्छक ,शिक्छण और शिक्छा प्रदान करने वाले विश्वविद्यालय i भी लक्छ्य भ्रस्ट होकर शिक्छण कार्य से विरक्त होका राजनीति में रूचि ले रहे हैं !और उस राजनीति का अनुशीलन कर रहे हैं !जिस से देश में अराजकता और संविधान की मर्यादाओं का उल्लंघन होता है !इस छिछली संविधान विरुद्ध तथाकथित राजनीति को प्रोत्साहन राजनैतिक लोग अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए कर रहे हैं !इनमे एक तपका उन तथाकथित बुद्धिजीवियों का भी है !जिनमे व्योहारिक ज्ञान का पूर्ण अभाव है  किन्तु किताबी ज्ञान भारवाही गधों की तरह अपने दिल दिमाग पर लादे हुए हैं !और उस किताबी ज्ञान का उपयोग भी अपने निहित स्वार्थों के लिए कर रहे हैं !जे एन यू में ९ फरबरी कोजो कुछ हुआ !उसकी सही जानकारी ना तो दृश्य और श्रव्य मीडिया ने दी  है  और न ही समाचार पत्रों ने ही दी ! और अभी भी उस दिन विश्वविद्यालय में क्या हुआ था !उसकी वास्तविकता के बारे में भ्रम फैलाने वाले समाचार छापे और दिखाए जा रहे हैं !एक समाचार यह दिखाया गया है !कि जिस वीडियो में छात्रों के पाकिस्तान जिंदाबाद ,हमें चाहिए कश्मीर की आजादी और भारत की बर्बादी ,कितने अफजल मारोगे घर घर में अफजल पैदा होंगे !आदि राष्ट्र विरोधी नारे सब सत्ताधारी राजनैतिक दल का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए फर्जी तैयार  किया गया था !विश्वविद्यालय में ऐसे नारे लगाए ही नहींगये थे ! एक बात निश्चित तौर  पर कही जा सकती है ! !जे एन यू छात्र संघ के अध्यक्छ कन्हैया की गिरफ्तारी निश्चित ही राज द्रोह के आरोप में गलत थी !दिल्ली पुलिस ने हड़बड़ी में बिना पूरी जानकारी के यह गिरफ्तारी की जिसके परिणाम स्वरुप  यह एक राजनैतिक मुद्दा बनगया !और साम्यबादी दल  विचार के लोग तथा अन्य प्रमुख राजनैतिक दल भी इस गिरफ्तारी के विरोध में सक्रीय हो गए !और छात्रों ने भी जगह जगह विरोध में प्रदर्शन किये  ! इस एक गिरफ्तारी के कारण यह सारा मामला देश और विदेश में भी सुर्ख़ियों में चर्चा में आगया  !जिन्होंने भी कन्हैया का भाषण टेलीविज़न पर सुना उन सभी की यही राय थी कि कन्हैया ने कोई भी देश विरोधी नारा नहीं लगाया था !बल्कि इन नारों का विरोध किया था !कन्हैया साम्यबादी विचार का समर्थक और भाजपा तथा संघ का घोर विरोधी है !इसिलए उसके भाषण में संघ और भाजपा की नीतियों का विरोध तो था किन्तु उसकी   देश के संविधान में पूर्ण आस्था भी थी !उसने अपने भाषण के अंत में लालसलाम और भीमराओ आंबेडकर की जिंदाबाद के नारे भी लगाए थे ! सभी राजनैतिक दल इस पर एकमत थे कि जिन लोगों ने देशविरोधी नारे लगाए थे उन के  विरुद्ध कठोर कार्यबाही की जाय किन्तु निर्दोष छात्रों का उत्पीड़न ना किया जाय !गृहमंत्री ने यह आश्वासन भी दिया था कि निर्दोष छात्रों को परेशान नहीं किया जाएगा किन्तु दोषी छात्रों को बख्सा भी नहीं जाएगा !किन्तु हुआ इसके विपरीत !कार्यवाही का प्रारम्भ ही निर्दोष छात्र की गिरफ्तारी से हुआ !भारत सरकार की जाँच एजेंसियों ने भी यह कहा कि कन्हैया के विरुद्ध देश विभाजक नारे लगाने का कोई सबूत नहीं है !और अब तो पुलिस ने भी यह घोषणा  की है की यदि कन्हैया जमानत के लिए प्रार्थना  पत्र देगा तो पुलिस उसकी बेल का विरोधनही करेगी !जिस उमरखालिद ने विश्वविद्यालय में आत्तंकवादी अफजलगुरू की बरसी का आयोजन ९ फरबरी को विश्वविद्यालय में कराया था !और जो अपने साथियों के साथ फरार हो गया था !अब बो भी जे एन यू में खुले आम घूम रहा है !और अपनी निर्दोषता सिद्ध कर रहा है !अब दिल्ली पुलिस उसको भी गिरफ्तार नहीं कर रही है !
 इस सारे प्रकरण में जो एक प्रशन  उभरकर आया है !वह यह है !कि राष्ट्रबाद और राष्ट्र द्रोह वास्तव में क्या है ? इस सम्बन्ध में अधिकाँश बुद्धिजीवियों का यह मत है !कि भारतीय दंडविधान की राजद्रोह के  धारा १२४ अ  ब्रिटिश हुकूमत ने अपने साम्राज्य को सुरक्छित करने के लिए बनायी थी !इसीलिए बास्तव में यह राष्ट्र की रक्छा के लिए न  होकर अंग्रेजों के शैतानी शासन  के विरुद्ध आवाज उठाने वालों के विरुद्ध प्रयुक्त होती थी !इसीलिए यह राष्ट्र द्रोह ना होकर स्थापित सत्ता का न्यायपूर्ण विरोध करने वालों का राज्य द्रोह था !जिसके कारण ब्रिटिश शासन  का विरोध करने वाले तिलक और गांधीजी को भी कठोर सजाएं दी गयी थी !और भगत सिंह सुखदेव ,रामप्रसाद बिस्मिल राजगुरु ,असफाक उल्ला आदि को शूली पर लटकाया गया था !इसीलिए स्वतंत्र भारत में साम्राज्य बाद की रक्छा करने वाली इस धारा को अब कानून से समाप्त कर देना चाहिए !लोकतंत्र में राज्य सत्ता की जनविरोधी  नीतियों का विरोध करने का मौलिक अधिकार नागरिकों को है ! इस धारा से नागरिकों के सत्ता का विरोध करने के अधिकार का हनन होता है !
इस समय देश में एक विचित्र प्रकार की राष्ट्र भक्ति दिखाई दे रही है !गांधीजी के हत्यारे  गोडसे को महिमा मंडित किया जा रहा है !खुले आम उसके नाम पर चौराहों पर उसकी मुर्तिया और मंदिर बनाने के निर्माण की बात हो रही है !उसकी जन्म जयंती भी मनाई गयी !उसके द्वारा  गांधी जी की हत्या को  देश हित में बताया जा रहा है !गांधी जी को देश द्रोही और गोडसे को देश भक्त बताया जा रहा है !गांधी जी का नाम भारतीय मुद्रा से हटाने की बात जोर शोर से की जा रही है !कांग्रेस को जडमूल से समाप्त करने की घोषणाएं की जा रही है !कांग्रेसी शासन को अब तक  का सबसे बड़ा कुशाशन बताया जा रहा है ! !अगर कोई व्यक्ति मोदीजी के विरोध में एक शब्द भी बोलता है !तो उसका  स्वागत अत्यंत भद्दे शब्दों में किया जा रहा है !कुछ लोग मोदी के लिए भी अपशव्दों का प्रयोग कर रहे हैं !सारा देश मोदी विरोध और मोदी के समर्थन में बिभाजित दिखाई देता है ! ऐसा दृश्य देश में इसके पहले कभी नहीं देखा गया था !श्री अटलबिहारी  बाजपेयी भी देश के ४ बार प्रधान मंत्री रहे किन्तु उनके कार्य काल में भी देश का बातावरण कभी भी विषाक्तनहीं हुआ !इन सारी घटनाओं और गतिविधियों को देख कर बहुत से बुद्धिजीवी नक्सल  बादियों  का समर्थन करते हैं !और बे कहते हैं !सामाजिक अन्याय के कारण यह नक्सलबाद उत्पन्नहुआ है !सरकार पूंजीपतियों  के हित में काम कर रही है !देश के किसानो की जमीने छीनी जा रहीं हैं !बे आत्महत्या कर रहे हैं !एक लाख गाओं नष्ट हो चुके हैं !बड़े पूंजीपतियों के हजारों करोड़ों  के ऋण माफ़ कर दिया गए हैं !और सूखा से ग्रस्त किसानो के घरों और जमीन जायदाद की कुड़की कर ली जाती है !जल जंगल और जमीन पर पूंजी पतियों के  कब्ज़ा हो रहे !अब यदि लोग ऐसे आमजनविरोधी सरकार की अगर जान विरोधी नीतियों का विरोध करते हैं !तो यह राष्ट्र द्रोह है या राष्ट्र प्रेम ?और अगर सरकार ऐसे लोगों को पकड़ कर राज्य द्रोह के कानून का दुरपयोग कर उनको गिरफ्तार करतीहै !तो यह सरकार के द्वारा किया गया राष्ट्रद्रोह है या राष्ट्र प्रेम ?बहुत से बुद्धिजीवी और राजनैतिक दल जे एन यू की घटना को सरकार की गलत नीतियों के विरोध में उठी हुई शशक्त आवाज मान रहे हैं !और सरकार के कार्यवाही को छात्रों की अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रहार मान रहे हैं !और मीडिया की मदद से झूठे और फर्जी  आरोप छात्रों पर लगाने का आरोपलगा रहे हैं !इसिलए लोकतंत्र की सफलता के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि सभी राजनेता अपने राजनैतिक स्वार्थों से मुक्त होकर और तथाकथितबुद्धिजीवी भी निश्वार्थ भाव से इस प्रश्न पर विचार कर राष्ट्र को सही दिशा  दें जिस से अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार का भी हनन  ना हो और देश की संवैधानिक व्यबस्था भी नष्ट ना हो !

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