हम लोगों ने पश्चिमी संस्कृति को बिना जाने समझे उसकी फूहड़ नक़ल करना शुरू
कर दिया है जैसे पश्चिमी देशों के बफे सिस्टम की नक़ल हमने बहुत फूहड़ और गलत
ढंग से अपना ली है पहली बात तो जिस तरह से शादियों में आमंत्रित लोगों की
भीड़ यहाँ होती है वैसी भीड़ वहां नहीं होती है दूसरी बात इस प्रकार के भोजन
की ब्यवस्था अल्पाहार के लिए की जाती है न की मुख्य भोजन में! खड़े होकर
भोजन करना स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है इसलिए इसे तत्काल बंद कर अपनी
भारतीय परम्परा को भोजन विधि के रूप में स्वीकार करना चाहिए
इसी प्रकार दूसरी भौंडी नक़ल वैलेंटाइन डे की हो रही है स्त्री पुरष
सम्बन्धो का ढंग पाश्चात्य सम्बन्धो की तरह भारत में प्रिचलित नहीं है न ही
युवक युवती जिस प्रकार से प्रेम का इजहार पाश्चात्य देशों में करते है उस
प्रकार से भारत में नहीं होता है भारत में अगर किसी युवती से विवाह पूर्व
सम्बन्ध किसी युवक से हो चके हों तो युवक उस युवती से विवाह करने के लिए
शायद ही राजी हो किन्तु पाश्चात्य देशों में विवाह पूर्व सम्बन्ध विवाह
में बाधक नहीं होते हैं इसलिए वैलेंटाइन डे भारतीय परम्पराओं के अनुरूप
नहीं है यूरोप में भी वैलेंटाइन डे अब समाप्ति की ओर है किन्तु भारत में
जोर पकड़ रहा है युवाओं को इस पर विचार कर वैलेंटाइन डे की इस कुप्रथा को
समाप्त करना चाहिए
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