लोकतंत्र कानून से चलता है गुंडा गर्दी से नहीं वैसे भी इस देश में कानून
की अवहेलना सभी लोग करते हैं अब हिन्दू संगठनो ने गुंडागर्दी का नया
सिलसिला धर्म के नाम पर शुरू कर दिया है वैलेंटाइन दिन पर जिस तरह युवाओं
और युवतिओं को भारतीय संस्कृति के नाम पर दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया इस प्रकार
संस्कृति की रक्षा करने की सूझ इनको कहाँ से प्राप्त हुई? क्योँकि मनमर्जी
से गंडागर्दी के द्वारा संस्कृति की रक्षा करने का विधान किसी हिन्दू
धर्म ग्रन्थ में तो नहीं है जो लोग वैलेंटाइन डे ऐसे कार्यक्रमों
को भारतीय संस्कृति के लिए खराब मानते हैं उन्हें इसकी जड़ पर प्रहार करना
चाहिए जिन युवाओं युवतिओं का लालन पालन रिश्वत कमीशन चोरबाजारी हरामखोरी
आदि की कमाई से हो रहाहै उन्ही परिवारों के युवा युवतिओं के पास इस तरह के
कार्य कर्मों को मनाने के लिए पैसा है और स्वतंत्रता है इसलिए हिन्दू
संगठनो को कालाबाजारियों रिश्वत खोरों हराम की कमाई करने वालों को निशाना
बनाना चाहिए क्योँकि भारतीय संस्कृति के सबसे बड़े नाश करने वाले यही लोग है
जो धर्म और संस्कृति का नाश कर रहे हैं अगर जड़ कट जाएगी तो वैलेंटाइन जैसे
कार्यक्रमों के ब्रिक्छ अपने आप उखड जायेंगे अभिव्यक्ति की आज़ादी को
कानून द्वारा मर्यादित किया गया है यदि इसका उल्लंघन किसी कार्यक्रम में हो
रहा है तो उसके विरद्ध क़ानूनी कार्यवाही होनी चाहिए मनमानी नहीं वैसे भी
आजकल गुंडा गर्दी से आम आदमी पीड़ित है संस्कृति के नाम पर यह गुंडा गर्दी
की शुरुआत ठीक नहीं है
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