व्योहारिक ज्ञान ------- (१)-कष्टों और भय के अनेकों अवसर प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में समय समय पर आते हैं किन्तु ये मूढ और मुर्ख तथा विषयों के भोगी और विषयासक्त मनुष्यों पर ही अपना प्रभाव डालते हैं ! परन्तु ज्ञानी भगवान के भक्त उनसे प्रभावित नहीं होते हैं ! बे इन अत्यंत कष्ट युक्त और भय प्रदान करने वाली स्थितियों में भी सहज रूप से इनको सहन करते हैं ! और प्रसन्न रहते हैं !
(२)अर्थसंकट, ,दुस्तर दुःख ,तथा स्वजनों पर आयी विपत्तियों में भी ग्यानी व्यक्ति शारीरिक और मानसिक दुखों से विचलित नहीं होते हैं !
(३)रोग ,अप्रिय घटनाओं की प्राप्ति ,,अधिक परिश्रम ,तथा प्रिय वस्तुओं के वियोग ----- इन चार कारणों से शारीरिक दुःख प्राप्त होता है !
(४)समय पर इन चारों कारणों का प्रतिकार करना एवं कभी उनका चिंतन ना करना -----ये दो क्रिया योग (दुःख निवारण के उपाय हैं ) इन्ही से आधि (मानसिक कष्टों )और व्याधियों (शारीरिक कष्टों )की शांति होती है !
(२)अर्थसंकट, ,दुस्तर दुःख ,तथा स्वजनों पर आयी विपत्तियों में भी ग्यानी व्यक्ति शारीरिक और मानसिक दुखों से विचलित नहीं होते हैं !
(३)रोग ,अप्रिय घटनाओं की प्राप्ति ,,अधिक परिश्रम ,तथा प्रिय वस्तुओं के वियोग ----- इन चार कारणों से शारीरिक दुःख प्राप्त होता है !
(४)समय पर इन चारों कारणों का प्रतिकार करना एवं कभी उनका चिंतन ना करना -----ये दो क्रिया योग (दुःख निवारण के उपाय हैं ) इन्ही से आधि (मानसिक कष्टों )और व्याधियों (शारीरिक कष्टों )की शांति होती है !
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