Wednesday, 24 February 2016

गाय का बध जरूर कत्लखानों में होता है जिसको अधिकांशतः मुसलमान कसाई चलाते हैं बहुत सी गायें चोरी छिपे भी क़त्ल खानो में ले जाई जाती हैं किन्तु इनमे सबसे बड़े कसाई तो बे किसान है जिन्होंने गोचर भूमि को समाप्त कर दिया है और गायों को मरने केलिए सड़कों पर छोड़ दिया है दूसरी कसाई सरकारें हैं जो मांश निर्यात के लिए नए नए कत्लखाने खोलती है फिर तीसरे नंबर पर मुसलमान कसाई आता है वह किसी के घर से जबरदस्ती गाय छुड़ाने नहीं जाता है इसलीए अगर गाय को मरने के लिए सड़कों पर किसान लोग न छोड़ें और गोचर भूमि से अपना कब्ज़ा हटाकर गाय को चरने के लिए चारा आदि प्राप्त कराएं तो गाय कसाई खानो तक पहुंचेगी नहीं किन्तु लोग गो माता की जय बोलते है गाय के बध के लिए कसाइयों को दोष देते हैं और गाय बध बंद हो इसके लिए नारेबाजी करते हैं किन्तु गाय को पालते नहीं है आज गाय की कोई कीमत नहीं है सड़क पर फिरती हुई गाय कोई भी पकड़ कर बांध सकता है प्राचीन काल में गोपालन बड़े पैमानें पर होता था और इसको व्योपारी समाज भी पालता था गीता में कहा है कृषि कार्य गाय का पालन और व्यापर ये वैश्य के स्वाभाविक कर्म है १८(४४)आज भी व्योपारी समाज गाय पालन का काम अपने हाथ में लेकर गाय के पालन के साथ आर्थिक लाभ भी कमा सकता है क्योँकि गाय की हड्डी दूध दही मूत्र गोबर मूत्र आदि सभी कीमती है

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