Friday, 26 February 2016

पुत्र कुपुत्र होता है माता कुमाता नहीं होती है -------===  वैदिक धर्म में आदिशक्ति का स्मरण अनेक नामों से किया जाता है !और भक्त लोग उनकी उपासना अनेक रूपों में करते हैं ! इन्ही आदिशक्ति का एक नाम महिसासुर मर्दिनी है ~महिसासुर नामक आततायी असुर  का बध करने के कारण इनका नाम महिसासुर मर्दिनी हो गया था !इसीलिए वैदिक धर्म में इन आदिशक्ति की उपासना दुष्टों और धर्म द्रोहियों  के विनाश और उन पर विजय प्राप्त करने के ;लिए की जाती है ! ५००० हजार साल पूर्व जब कुरुछेत्र में दुष्ट कौरवों के विरुद्ध और उनको नष्ट करने के लिए पांडवों ने युद्ध किया था !तब भगवान श्री कृष्ण ने  अर्जुन से इन्ही महिसासुर मर्दिनी आदि शक्ति की उपासना करायी थी ! वैदिक धर्म अत्यंत उदार धर्म हैं !इसमें धर्म का विरोध करने वालों की हत्या नहीं की जाती है !दक्छिण भारत के केरल में जन्मे शंकराचार्य ने इन्ही महिसासुर मर्दिनी आदिशक्ति की उपासना में एक स्त्रोत लिखा है !जिसमे उन्होंने  आदि शक्ति की वंदना करते हुए कहा है !कुपुत्रो जायते क्वचदपि कुमाता न भवति  (पुत्र कुपुत्र होता है !माता कुमाता नहीं होती है ) ऐसे हे कुपुत्रो ने भष्मापुर की जयंती मनाई और महिसासुर मर्दिनी आदिशक्ति को वैश्या कहा और भस्मासुर को महिमा मंडित किया था !और उन कुपुत्रो के इस घिनौने कृत्य को बहुत से कुपुत्र महिमा मंडित कर रहे हैं !और इसे अभिव्यक्ति की आजादी बता रहे हैं !तथा जो इन कुपुत्रो की भर्त्सना कर रहे हैं !उन्हें ये कुपुत्र फासीवादी बता रहे हैं !इन कुपुत्रो का साहस कभी उन धर्मों की आलोचना करने का नहीं होता है !जिनका थोड़ा सा विरोध भी इन कुपुत्रो को जिन्दा नहीं रहने देगा !ये कुपुत्र तो अपनी ही माँ को वैश्या  बता सकते हैं !क्योंकि ये जानते हैं !कि इन कुपुत्रो की माँ कुमाता नहीं हो सकती है !ये कुपुत्र अपनी माँ को वैश्या  बताने के लिए ऐसे उदहारण भी पेश करते है !जिनको समाज ने कभी स्वीकार नहीं किया !इन कुपुत्रो को दक्छिण भारत में उत्पन्न हुए रामास्वामी पेर्रियार तो दिखाई देते हैं !किन्तु दक्छिण में पैदा हुए अलौकिक ज्ञानी शंकराचार्य ,रामनुजा चार्य ,निम्बार्काचार्य ,श्रीधर ,,और तमिलनाडु के शैव वैष्णव संत और कर्णाटक के और आन्ध्रा  तथा केरल और मलाबार के संत नहीं दिखाई देते हैं  !तमिलनाडु की महान महिला संत अरुण्डाल ,का तिररूपाबैयि ग्रन्थ  और ,जिनका  स्थान भारत भर की पांच महिला संतों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है ! लोग उनको दक्छिण की मीरा कहते हैं ! वह महान कृष्ण भक्त थी ! अप्पा स्वामी उन्होंने जैन गुरु से दीक्छा ली थी ! उन्होंने शिव महिमा के भी अनेक स्त्रोत लिखे हैं 1 मणिवाचक्कर की तमिलनाडु के प्रमुख चार शैव संतो में  गड़ना की जाती है संत तिरुवल्लबार ,नम्मालबार ,कम्बन ,कुरताल्बार रामलिंग स्वामी सुब्रमनियम भारती कर्णाटक के महान संत पुरंदर दास बास्वेस्वर तेलगु भक्त त्यागराज महाकवि पोतना और केरल  मलाबार के संत एलुत्तच्छन  आदि के नामों और कार्यों का स्मरण नहीं होता है ! ये बोलोग है !जो अपनी ही माता को अपमानित कर सकते हैं !भारत में बौद्ध  धर्म अहिंसा ,प्रेम ,करुणा आदि का उपदेश देते हैं !बुद्ध ने बताया है कि बैर से बैर का अंत नही होता है !वैर का अंत प्रेम से और अहिंसा से होता है !वैदिक धर्म को त्यागकर जिन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकार किया है  बे बुद्ध की इस सीख को स्वीकार नहीं करके वैदिक धर्म का अनर्गल और असत्य , मनगढंत    प्रचार उसी प्रकार करते रहते है ! जैसे चीन के बौद्ध तिब्बत   के बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा को रंगा सियार और धर्म के वेश में खूँख्वार भेड़िया कहते हैं !अब इन कुपुत्रो को यह समझ लेना चाहिए कि माता के भक्त जो सुपुत्र हैं और माता की गरिमा ,महिमा  और महत्ता को समझते और स्वीकार करते हैं !बे इन कुपुत्रो द्वारा किया गया माता का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे !और न ही भारत माता या महिसासुरमर्दिनी आदिशक्ति को पिशाचिनी और वैश्या  कहने की  अनुमति देंगे !

No comments:

Post a Comment