Saturday, 6 February 2016

ओबामा ने जो वक्तव्य प्रार्थना सभा में दिया है कि भारत में जो धार्मिक असहनशीलता की हवा बह रही है यदि गांधीजी आज होते तो उसको देख कर स्तब्ध रह जाते इस वक्तव्य पर वर्तमान युग की सर्वधर्म समभाव की आवश्यकता की दृष्टि से विचार करने की आवश्यकता है इस सर्वधर्म समभाव विचार के आधुनिक प्रणेता आचरण में उतारकर विश्व्पटल पर रखने वाले गांधीजी ही हुए हैं और इसी लक्छ्य की प्राप्ति में जीवन भर संलग्न रहने वाले गांधी जी को प्राणो की आहुति भी इसीलिए देनी पड़ी और आज देश में इसी के कारण उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे को राष्ट्र भक्त कह कर महिमा मंडित किया जा रहा है और गांधी जी को हिन्दू धर्म का दुश्मन धार्मिक कट्टरता कभी भी भारत भूमि में अनादि काल से नहीं रही किन्तु धर्म में जब प्रचलन में जीवन को श्रेष्ठ गति देने वाले सनातन सिद्धांत सत्य अहिंसा अपरिग्रह अस्तेय ब्रह्मचर्य का अभाव और अधर्म का प्रभाव बढ़ने लगा तब सुधार के लिए जैन धर्म और आधुनिक काल में बौद्ध धर्म का इन सनातन सिधान्तो पर आधारित धर्म का भारत भूमि में जन्म हुआ मुस्लिम काल में जब जब भारत में बाहर से प्रवेश करने वाले ईसाई और मुस्लिम धर्म का प्रवेश हुआ और इन्होने भारत के आदि धर्मो की सर्ब धर्म समावेशिक की नीति का नाजायज लाभ उठाकर हिन्दुओं का लालच और तलवार के बल पर भारी मात्र में धर्म परिवर्तन कराया और हिन्दुओं पर असयहनीय अत्याचार किये मंदिर तोड़े हिन्दू संस्कृति को अपमानित किया तब उसकी रक्षा करने का कार्य शांति प्रिय आध्यात्मिक ढंग से तुलसीदास नामदेव आदि महान संतो ने किया और छात्र शक्ति से महाराणा प्रताप ने और कूटनीति तथा युद्ध कौशल से महान संत समर्थ रामदास से शक्ति प्राप्त कर शिवाजी ने किया और हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए साधु संतों ने भी संतो में ही से कुछ अस्त्र शस्त्र युक्त संगठन निर्माण किये जो गुसाईं नागा साधुओं आदि के रूप में विख्यात हुए और पंजाब में धर्म की रक्षा में अनेक सिख गुरुओं ने जीवन बलिदान किया और गुरु गोविन्द सिंह ने धर्म रक्षा के लिए ही सिख धर्म को जन्म दिया किन्तु आज की मांग धार्मिक कट्टरता नहीं धार्मिक उदारता है जिसका उद्घोष वर्तमान भारत में गांधीजी ने किया और इसकी रक्षा में अपने प्राणो की आहुति दी इस सर्वधर्म समवेशिक धर्म की सफलता के मार्ग में सबसे बड़ा रोड़ा इस्लामिक संगठन जैसे कट्टरपन्थी समूह है जो मुस्लिम देशों में सक्रिय है और आत्तंक और अमानवीय अत्त्याचारों के प्रतीक बन गए हैं किन्तु इस कारण से हम भारत भूमि में सर्वसमावेशिक धर्म के भाव को नष्ट नहीं कर सकते हैं किन्तु आज यह होता दिखाई दे रहा है हिन्दू राष्ट्र की मांग घर वापिसी ऐसे प्रोग्राम आदि तथा गांधीजी को हिन्दुओं का दुश्मन और गोडसे को राष्ट्र भक्त बताकर उसका मंदिर और चौराहों पर मूर्तियां आदि लगाने के प्रयत्न इस धार्मिक असहनशीलता की ओर इशारा कर रहे हैं यही सब जानकर और देख कर ओबामा ने कहा है कि आज गांधीजी होते तो स्तब्ध रह जाते हम सब को भारत की मूल धार्मिक अबधारणा धार्मिक उदारता की ओर मुड़ना चाहिए और शांति सद्भाव और सर्व धर्म समावेशिक धर्म के आधुनिक प्रणेता गांधी जी के आचरण का अनुसरण करना चाहिए हमारा जीवन आदर्श धार्मिक कट्टरता नहीं धार्मिक उदारता है

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