Tuesday, 28 July 2015

डॉ कलाम की मृत्यु पर राष्ट्रपति , प्रधान मंत्री, मुख्य मंत्री और देश के अन्य सभी गैर राजनैतिक संगठन , शिक्छण संस्थाओं ,चैनलों , सोशल मीडिया आदि में उनको भाव भीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है !और उनके प्रेरणास्पद जीवन के आदर्शों को भी विस्तार से समाचार पत्रों और चैनल्स के माध्यमों से प्रस्तुत किया जा रहा है !मृत्यु के बाद डॉ कलाम अधिक जीवित हो गए हैं ! !किन्तु जब बे जिन्दा थे !तब उनकी चर्चा नहीं के बराबर थी !यहाँ तक की कुछ दिन पूर्व जब बे अस्पताल में भर्ती थे ! तब इस समाचार का प्रकाशन भी कहीं नहीं हुआ था !और ना ही कोई नेता उनके स्वास्थ्य की जानकारी करने गया था ! हमारे देश में बोलने वाले शव्दों की महत्ता को महत्त्व नहीं देते हैं !इसीलिए शब्दों की भव्यता के अनुरूप जीवन को खड़ा  नहीं करते हैं !कोई भी महापुरुष संसार में प्रथम या अंतिम नहीं होता है !महापुरुषों  के जीवन का निर्माण पूर्व बर्ती महापुरुषों द्वारा आचरित आदर्श जीवन के अनुसरण करने से होता है !शाब्दिक प्रसंसा से नहीं !इसीलिए बे जीबन की यात्रा के  कठिन प्रसंगों  मान, अपमान ,हानि .लाभ  आदि की चिंता ना करते हुए अपने आदर्श जीवन को जीते हैं !उनके प्रति श्रद्धा अर्पित करने का एक मात्र तरीका यह है कि उनको शाब्दिक श्रद्धांजलि के साथ उनके श्रेष्ठ जीवन मूल्यों को भी जीवन की सभी स्थतियों और परिस्थितियों  में जिया जाय ! महापुरुष अपने जीबन में पूर्व महापुरुषों के जीवन को ही जिन्दा करते हैं !जिस तरह से धनवान व्यक्ति अपने धन की सुरक्छा के लिए धन को सार्वजानिक नहीं करता है  ! उसको तिजोड़ी में छिपा के रखता है !उसी प्रकार श्रेष्ठ गुणवान पुरुष बनने की जीवन यात्रा पर चलने वाले पुरष अपने पूर्वबर्ती महापुरुषों के गुणों के बखान में समय व्यर्थ न कर उनको जीवन के साथ लेकर जीता है! !जिस प्रकार गर्भिणी स्त्री को मातृ सुख प्राप्त करने के लिए ९ माह गर्भ धारण कर पेट में पल रहे गर्भ की सुरक्षा करनी पड़ती है !तब उसे माँ बन ने का अवसर प्राप्त होता है !उसी प्रकार डॉ कलाम जैसे महापुरुषों को बास्तविक श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए व्यक्तियों को  अपने ईमान, सदाचार, देशभक्ति और कर्त्तव्य निष्ठा की सुरक्षा करनी पड़ती है !और इस कहाबत को सिद्ध करना पड़ता है की महापुरुषों की मृत्यु नहीं होती है !इसलिए डॉ कलाम जब जीवित थे तो एक शरीर में थे ! अब उनको श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों के शरीरों में कर्त्तव्य निष्ठा के रूप में दिखाई देना चाहिए

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