Sunday, 5 July 2015

नियतं कुरु कर्म त्वम् ३(८)----नियत कर्त्तव्य  कर्म मनुष्यों को स्वेक्छा ,परिस्थति या विरासत में प्राप्त होते हैं !अगर कोई व्यक्ति राजनीति में प्रवेश करना चाहता है !तो उसका राजनीति में प्रवेश स्वेक्छिक कर्म होगा !इसीलिए राजनैतिक कर्म ही उसका नियत कर्त्तव्य  कर्म होजायेगा !अब उसकी यह जिम्मेदारी हो जायेगी की वह राजनैतिक कर्तव्य कर्म पूरी निष्ठा नियम कानूनो का पालन करते हुए राजनैतिक पद का उपयोग देश और समाज सेवा में लगाए !राजनीति में उसकी ईमानदारी का श्री गणेश किसी निर्वाचित पद की उम्मेदबारी से शुरू होता है !चुनाव लड़ने वाले के लिए यह वैधानिक रोक होती है !कि वह मतदाताओं को लोभ लालच ना दे , लोगों को अपनी स्वेच्छा से मत देने दे !झूठे वायदे ना करे और जातिबाद का सहारा न ले !किन्तु कोई भी नेता इस प्रथम शर्त का पालन नहीं करता है !मतदाताओं को शराब वस्त्र रूपया भोजन आदि  खुले आम दिया जाता है !दबंग उम्मीदवार मतदाताओं को मत नहीं डालने देते हैं !खुद ही अपने गुंडों से अपने पक्छ में मत डलवा लेते हैं !जाति और झूठ का सहारा लेकर चुनाव जीत जाते है !चुने जाने के बाद देश सेवा और समाज सेवा लुप्त रहती है !रुपया कमाना ही मुख्य उद्देश्य हो जाता हैं !इसीलिए नेता लोग या उनके समर्थक ही जल जंगल जमीन और खनिज आदि के साथ सड़क पुल भवन निर्माण आदि के ठेके ले लेते है और स्वीकृत मानदंडो के अनुसार कार्य नहीं करते हैं !इन  अवैधानिक कामों में भ्रष्ट अधिकारी उनके सहयोगी बनकर खुद भी रुपया कमाते हैं ! इस  बेईमानी से उपार्जित धन से बे बार बार चुनाव लड़ते और जीतते  हारते रहते हैं!इस प्रकार राजनीति समाज और देश के हित में ना रहकर बेईमान लोगों के अनैतिक कार्यों की स्वार्थ पोषक हो जाती है !इस प्रकार की राजनीति ग्राम पंचायत से लेकर स्वेक्छिक संगठन तक में प्रवेश कर जाती है !और देश और समाज का स्वस्थ ताना बाना नष्ट कर देती है !और जागरूक लोग इस राजनीति का विकल्प खोजना शुरू कर देते हैं !विकल्प स्वरुप का नहीं ऐसे व्यक्तियों  का खोजना चाहिए जो अपने नियत कर्त्तव्य का निष्ठा पूर्वक पालन करें !दोष स्वरुप का नहीं है ! दोष उन मनुष्यों में है ! जो स्वरुप के अनुरूप कर्तव्य कर्म नहीं करते हैं !कोई भी कर्तव्य कर्म छोटा  बढ़ा,  महत्त्व पूर्ण या कम महत्त्व का नहीं होता है !सभी नियत कर्तव्य कर्म  करना जरुरी होते हैं !समाज का गठन पारस्परिक सहयोग और समझौते से होता है !और उसका संचालन कर्त्तव्य रूप नियत कर्मों से होता है !न्यायाधीश अपराधी को मृत्युदंड देता है ! यह न्यायाधीश का नियत कर्म है !और जल्लाद उसको सूली पर चढाता है !यह जल्लाद का नियत कर्त्तव्य कर्म  है !अगर जल्लाद अपने नियत कर्त्तव्य का पालन न करे तो न्यायाधीश का आदेश निरर्थक हो जाएगा !गीता कहती है प्रत्येक व्यक्ति को अपने नियत कर्त्तव्य का पालन अवश्य  करना चाहिए !समाज में ओरदेश के अधिकांश छेत्रों में जो अव्यवस्था  और भ्रष्टाचार अनैतिकता अधर्म हिंसा आदि के जो घनीभूत आक्रमण हो रहे है और स्वार्थ का घटाटोप अन्धकार छाया हुआ है ! !उसका एकमात्र कारण यह है कि जिम्मेदार लोग अपने नियत कर्तव्यों का निष्ठा पूर्वक पालन नहीं कर रहे हैं !

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