Wednesday, 15 July 2015

मोहर सिंह डाकू नहीं थे !बागी थे !पुलिस और प्रसाशनिक व्यबस्था जब भ्रष्ट हो कर अपराधियों ,शोषकों और शक्तिशाली लोगों के हित में काम करने लगाती है !और लोकतंत्र में जिम्मेदार पदों पर जब स्वार्थनिष्ठ नेता काबिज हो कर समाज के न्यायिक हितों कीउपेक्छा कर ने लगते हैं !तब इस लोकविनाशक मण्डली के विरुद्ध मोहर सिंह ऐसे साहसी लोग बगावत कर देते हैं !और पुलिस भी उन पर सभी जुर्म जरायम लगाती रहती है! !बोरिंग में जल वहीं से प्राप्तनहोता है ! जहां जमीन के अंदर जलस्रोत होता है !अगर जमीन के अंदर जलस्रोत नहीं है ! तो बोरिंग से जल की प्राप्ति नहीं होती है !उसी प्रकार से अगर मनुष्य के अंदर अच्छाई ना हो तो सदाचरण नहीं निकल सकता है !मोहर सिंह ऐसे लोग अपराधी प्रवृत्ति के नहीं होते हैं ! किन्तु बे समाज में व्याप्त अत्याचार अनाचार को सहन नहीं कर पाते है !इसलिए बागी हो जाते हैं ! और फिर बे ही उच्च पदस्थ लोग जो अपने सामाजिक और प्रसाशनिक उत्तर्दायित्त्वों का निष्ठा पूर्वक निर्वहन नहीं करते हैं ! ऐसे बागियों को डाँकू और अपराधी की संज्ञा प्रदान कर देते हैं !इन बागियों को विनोबा भावे के प्रति श्रद्धा जगी और लोकनायक जय प्रकाश नारायण के नेतृत्वव में गांधीवादियों के सहयोग से इन बागियों को नवजीवन प्राप्तहुआ ! और अब बे समाज हित में संलग्न हो कर समाज निर्माण के कामों में लगे हुए हैं !मोहर सिंह मूरत सिंह मानसिंघ आदि सरकार की नज़रों में डाकूँ रहे ! किन्तु समाज में तो बे बागी ही माने जाते रहे हैं !आजभी बहुत से न्याय प्राप्ति के लिए संघर्श  रत संगठन कानून अपने हाथ में लेकर और कानून तोड़ कर हिंसक गतिविधियों में संलग्न है !और सरकार उनको अन्याय निबारण  के लिए रचनात्मक भूमिका प्रदान नहीं करा पा रही है ! फिर से एक बार गांधीवादियों और रचनात्मक बुद्धिजीवियों का सहयोग लेकर सरकार को नक्सल समस्या आदि अनेक उग्रवादी संगठनो को रचनात्मक कार्यों में लगाने का प्रयत्न करना चाहिए ! देश में बहुत से ऐसे रचनात्मक गांधीवादियों के संगठन है जो हिंसात्मक गतिविधियों को अहिंसात्मक ढंग से समाधान कराने के लिए प्रयास रत हैं !अगर सरकारें उनका समर्थन और सहयोग प्राप्त करें ! और उनको सहयोग और समर्थन दें !तो  देश में हिंसात्मक गतिविधियों की दिशा और दशा अहिंसात्मक और रचनात्मक गतिविधियों में परिवर्तित होसकती है !

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