Tuesday, 21 July 2015

वैदिक धर्म के जो अत्यंत चमत्कारिक रहस्य हैं !उनको बुद्धि से नहीं जाना समझा जा सकता है !शरीरों के अंदर रहने वाले आत्मा में जो अनंत और चमत्कारिक शक्ति है ! इसकी खोज ऋषियों ने तदनुसार जीवनचर्या को धारण और अपनाकर की थी !और इसी आत्मशक्ति से भारत ने बिना ईंधन से चलने वाले बायुयान परमाणु बम्ब से भी अधिक शक्तिशाली अग्निवाण और ब्रह्मशिर जैसे बिध्वंसक अश्त्र शास्त्र  !और युद्ध में घायल होने वाले सैनिको को तुरत स्वस्थ कर देने वाली और घाँवो को भर देने वाली विशालयकारिणी जैसी औषधियां भी तैयार की थी !और आत्मशक्ति से ही भारत के ऋषि संकल्प मात्र से ही अन्तरिक्छ के लोकों के भ्रमण आधुनिक यानो से भी अधिक तीब्रगति से कर आते थे !इसलिए प्राचीन भारत सभी प्रकार से समृद्ध भारत था !किन्तु इस भौतिक समृद्धि में भौतिक पदार्थों के स्थान पर आत्मशक्ति का ही उपयोग होता था !इसलिए भारत में कभी भी पर्यावरण की समस्या उत्पन्न नहीं हुई !धार्मिक दृष्टि से जो दूसरा बहुत बड़ा योग दान भारत का रहा वह है ! अजन्मा अविनाशी परमात्मा की शक्ति को मन्त्रों के द्वारा मूर्ति में स्थापित कर देना !जिसे नासमझ और भारतीय अध्यात्म शक्ति से अपरिचित अज्ञानी लोग मूर्तिपूजा कहते हैं !वह मूर्ति पूजा नहीं है ! बल्कि मंत्र शक्ति और विधिविधान से स्थापित मूर्ति में  परम शक्ति परमात्मा की उपासना है !निर्गुण, निरकार ,अजन्मा, अविनाशी परमात्मा को मूर्ति में स्थापित कर उसकी साधना उपासना और भक्ति को साधकों , आराधकों और भक्तो को सर्व सुलभ बना देने की विधि और प्रक्रिया है !उसी परमात्म शक्ति को दर्शित करने के लिए देश माँ अद्भुत मंदिरों का निर्माण हुआ है  ! जिसमे तत्कालीन इंजीनियरों की प्रतिभा के दर्शन के साथ परमात्मा की अलौकिक शक्ति के दर्शन भी होते हैं ! भास्कर इसके लिए धन्यबाद का पात्र है  ! कि वह देश की अध्यात्म शक्ति कापरिचय लोगों को करा रहा है !किन्तु ऐसे मंदिरों का टाइटल मिस्टीरियस मंदिरों के स्थान पर चमत्कारिक मंदिर होना चाहिए !

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