Tuesday, 28 July 2015

भारतीय लोकतंत्र के प्रारम्भिक बर्षों  में प्रधान मंत्री गैर राजनैतिक व्यक्तियों को उनकी देशभक्ति ,कर्त्तव्य निष्ठा आदि को देखकर केंद्रीय मंत्री मंडल में शामिल होने की प्रार्थना करते थे !कुछ लोग राजनीति में आने से मना कर देते थे !और कुछ लोग प्रधान  मंत्री के आग्रह को स्वीकार  कर केंद्र में मंत्री बन जाते थे !गोपाल स्वरुप पाठक, .हिदायतुल्ला  आदि ऐसे व्यक्ति थे  !जो कानून  के छेत्र से आये थे ! और देश के उप राष्ट्र पति बने !महान शिक्छाविद और दार्शनिक डॉ राधा कृष्णन भी राजनैतिक व्यक्ति नहीं थे !जो देश के राष्ट्रपति बनाये गए थे !केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी अब्दुल करीम छागला डॉ वीके आर बी राओ भी राजनेता नहीं थे ! होमी भाभा को भी मंत्री मंडल के लिए आमंत्रित किया गया था ! किन्तु उन्होंने मंत्री बनने से माना कर दिया था ! डॉ एपीजे अब्दुल कलाम भी राजनेता नहीं थे !किन्तु उनमे राजनीति के बे सभी गुण थे जिसकी कल्पना गांधी जी ने स्वतंत्र भारत में की थी !गांधीजी ने कहा था की वाइसराय भवन जो अब राष्ट्र पति भवन है जब देश आजाद हो जायेगा तो उसमे अस्पताल खोला जायेगा ! राष्ट्रपति, मंत्री, प्रधान मंत्री जनता के सेवक होंगे ! भले ही कलाम राष्ट्र पति भवन में रहे ! किन्तु उन्होंने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की तरह राष्ट्रपति भवन का उपयोग अत्यंत सादगी से  किया !उनका दिल दिमाग भारत की आमजनता के साथ जीवन पर्यन्त जुड़ा रहा !उनके कर्त्तव्य छेत्र का रूप स्वरुप कुछ भी रहा हो ! उनकी त्याग तपस्या ब्रतनिष्ठा और सादगी को उनके जीवन काल में तत्कालीन केंद्र सरकार ने पहचाना और विपक्छी कांग्रेस ने भी उनका समर्थन किया !और बे भारत केराष्ट्रपति पद पर आसीन हुए !अब बे हमारे बीच नहीं है !किन्तु उनका जिया गया प्रेरणास्पद  जीवन हमारे सामने हैं !इसीलिए शाब्दिक श्रद्धांजलि के साथ उनके जीवन केआदर्षों को अपने स्वयं के लिए और समाज राष्ट्र और विश्व हित के लिए हम सबको धारण करना चाहिए !

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