संसार के सभी महान गुरु आत्मशक्ति से मुक्ति ,भगवद भक्ति ,या भगवद धाम की प्राप्ति कराने का उपदेश अनादि कल से करते रहे है !ओशो एक ऐसे गुरु थे जिन्होंने आत्मशक्ति का उपयोग भौतिक शक्ति प्राप्ति के लिए किया !परिणाम स्वरुप उनके पास भौतिक भोग सामग्री प्रचुर मात्रा में उपस्थित हो गयी !तथा इसके साथ ही भोगियों की लम्बी शिष्य श्रंखला भी खड़ी हो गयी !उन्होंने अध्यात्म साधना में वैराग्य के स्थान पर भोग को स्थान और महत्ता प्रदान की ! सम्भोग से समाधि की नयी चर्चा को जन्म दिया !उनका यह विचार उनके शिष्योँ को बहुत पसंद आया था !संन्यास का भी अजीबो गरीब स्वरुप उन्होंने प्रस्तुत किया! उनके सन्यासी और सन्यासिने मुक्त माव भाव से काम सम्बन्ध एक दूसरे के साथ स्थापित करते थे !उन्होंने माँ की भी पूर्व प्रचिलित आस्था और मान्यता पर कुठारा घात किया था !उनके शिष्य और सन्यासी सन्यासिनो को माँ कहते है ! औरउनके साथ कामजनित सम्बन्ध भी स्थापित करते हैं ! अभी भी ओशो के विचार को मानने वाली शिष्य मण्डली उनके नाम से आश्रम चलाती हैं! !और बहुत से लोग उनके विचारों के प्रसंशक भीहैं ! और उनको बहुत ध्यान से रूचि पूर्वक पढ़ते भी हैं !ओशो का जीवन दर्शन उनके विदेशी भक्तों को बहुत पसंद आता है !क्योँकि बे अमर्यादित काम जनित संबंधों को कायम रखते हुए ही ध्यान साधना से आत्मशांति और अत्मिकशक्ति चाहते हैं !भारत में भी कुछ ओशो की आत्मसाधना के प्रशंसक है !औरउनके ध्यान आदिके साधना शिवरों का आयोजन करते रहते हैं !ओशो को आत्मसाधना से प्राप्त आत्मशक्ति का भौतिक सुख भोग प्राप्त करने के कारण लम्बे जीवन की प्राप्ति नहीं हुई !और ६० साल की आयु प्राप्तहोने केपहले ही ओशोकी मृत्यु हो गयी !और इस प्रकार इस अमीरों के गुरु और ९० रोल्स रॉयस कारें रखने वाले आत्मसाधना से भौतिक भोग सामग्री प्राप्त करने और कराने वाले ओशो का नवीन अध्यात्म का प्रचार प्रसार और उपदेश करने वाले दर्शन की गति भी लगभग समाप्त होगयी !
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