Saturday, 18 July 2015

गांधी जी १९३१ में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में लंदन में तत्कालीन ब्रिटश सरकार के आमंत्रण पर गोलमेज परिषद में शामिल होने के लिए गए थे !ब्रिटिश सरकार ने उसमे शामिल होने के लिए ३१२ प्रतिनिधि नामजद किये थे !जिसमे भारतीय राजाओं के ,दलितों के ,मुसलमानो के ,आदिवासियों के ,तथा सरकार और अन्य समूहों आदि के प्रतिनिधि भी थे !ब्रिटिश हुकूमत ने भारतीय प्रितिनिधियों के आंतरिक मतभेदों के कारण भारत के लिए स्वतंत्र संविधान बनाने से मना कर दिया था !तब गांधीजी ने अपने भासण में कहा था, ki भारत में अंग्रेजी शाशन शैतानी हुकूमत है !उन्होंने ब्रिटिश  प्रधान मंत्री मैकडोनाल्ड को सम्बोधित करते हुए कहा था ! कि आपने हमें ६००० मील से भारत को स्वंत्रता का संविधान बनाने के लिए बुलाया था !भारत के अंदरूनी मामले भारत की जनता सुलझा लेगी !आप भारत को स्वतंत्रता दे दीजिये !राउंड टेबल कांफ्रेंस के बाद गांधीजी ने १९४२ में अंग्रेजो भारत छोडो आंदोलन के के लिए करो या मरो का नारा दिया था !किन्तु आजादी के इन मन्त्रों के साथ गांधी जी ने देश की जनता को स्वाबलंबन का मंत्र भी दिया था !और देश को स्वाबलंबी बनाने के लिए उन्होंने जनता के सामने रचनात्मक कार्यक्रम रखे थे !जिनमे खादी का कार्यक्रम मूख्य था !सभी कांग्रेसी खादी बुनते थे !और अपने द्वारा बुनी हुई खादी से ही बने हुए बस्त्रों को पहन ते  थे !गांधी वादियों  ने नारा दिया था जो बीज बोये सो खाए ! और जो काते सो पहिने  ! गांधीजी के इसी रचनात्मक कार्यक्रम का पालन और अनुसरण आज भी ८४ साल की सुभाष बोस  की बहु कर रही हैं !आज भी गांधी आश्रमों में ! और गांधी वादियों में ऐसे बहुत से गांधीवादी मिल जाएंगे जो गांधीजी के स्वाबलम्बी जीवन को खुद भी जी रहे हैं  !और लोगों को प्रेरित भी कर रहे हैं !और लोगों के सामने गांधीजी के ग्रामस्वराज्य का स्वरुप भी प्रस्तुत कर रहे हैं !इस प्रयत्न में लगे हुए गांधी वादी प्रचार तंत्र से दूर रहकर रचनात्मक कार्यक्रमों में लगे हुए हैं !और इन कार्यक्रमों के सार्थक परिणाम भी सामने आरहे हैं !देश को जैविक कृषि आदिका क्रांतिकारी कार्यक्रम गांधी वादियों की ही देन है !तथा भूमि का मालिकाना हक़ किसानो के पास ही रहे इसकी प्रेरणा और प्रोग्राम देश के सामने प्रस्तुत करने वाले एकता परिषद  जैसे अनेक गांधीवादी रचनात्मक संगठन ही है !

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