Thursday, 8 September 2016

गांधीजी की हत्या पर हुई नयी बहस ------ गांधीजी की हत्या के समस्त साक्छ्य और कारण प्रकाश में आचुके हैं !फिर भी तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है ! गांधीजी के अंतिम दिनों का म्रत्यु पर्यंत समस्त विवरण लास्ट फेज ऑफ़ महात्मा में दिया गया है !इस पुस्तक का हिंदी अनुबाद भी पूर्ण आहुति के शीर्षक से ४ भागों में प्रकाशित हो गया है ! पूर्ण आहुति के प्रथम खंड के पृष्ठ ११३ से गाँधी जिन्ना  की बार्ता   जो ९ सितंबर १९४४ से शरू होकर १८ दिन तक जिन्ना के मुम्बई  स्थित आवास  माउन्ट प्लेजेंट रोड पर हुई थी  जिसमें गांधीजी  ने देश का बटवारा ना करने के लिए जिन्ना को  समझाने का भरसक प्रयत्न किया था !किन्तु जिन्ना बिभाजन की मांग पर दृढ था और उसने गांधीजी की बात को सिरे से अस्वीकार कर दिया था !गाँधी जिन्ना की इस मुलाकत का हिंदुओं का एक वर्ग विशेषतः हिन्दू महासभा के सदस्य तीब्र विरोध कर रहे थे  ! उन्होंने सुचना दी थी कि बे बापू को झोपड़ी से नहीं निकलने देंगे ! उन्होंने गांधीजी की झोपड़ी के तीनो तरफ रास्तों में स्वयं सेवक बैठा दीये थे ! सुबह पुलिस सुपरिन्टेन्डेन्ट ने टेलीफोन पर सुचना फोन पर दी  थी कि स्वयं सेवक गम्भीर शरारत करना चाहते हैं इसीलिए पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था ! तलाशी लेने के बाद एक स्वयं सेवक से बड़ा छुरा बरामद हुआ था !पुलिस अफसर ने उनसे कहा  कि यह काम आपलोग अपने नेताओं पर क्यों नहीं छोड़ देते हैं !उसका जबाब था कि गांधीजी के लिए यह अधिक सम्मान की बात होगी इस काम के लिए तो जमादार  ही काफी है ! जिस व्यक्ति का जमादार के नाम से उल्लेख किया गया था वह नाथू राम गोडसे था ! और उसी ने साढ़े तीन साल बाद गांधीजी की हत्या की थी !एक झूठी खबर यह फैलाई जा रही है कि ३० जनबरी को उनकी अंतिम मुलाकात सरदार पटेल के साथ हुई थी किन्तु बात चीत किस विषय पर हुई थी इसका विवरण ज्ञात नहीं है !पूर्ण आहुति के खंड ४ में पटेल और गांधीजी की बात चीत का पूर्ण विवरण पृष्ठ ४६४ पर दिया गया हैं!४ बजे उसदिन की मुलाकातें समाप्त हुई ! इसके बाद गांधीजी पटेल और उनकी पुत्री को लेकर अपने कमरे में चले गए  !गांधीजी ने पटेल से कहा कि मेरा पहले यह विचार था कि आप या जवाहर लाल को मंत्री मंडल से हटा दिया जाय लेकिन अब में निश्चित तौर पर इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि दोनों का मंत्रिमंडल में रहना आवश्यक है ! आप दोनों की जरा सी भी फूट इस स्थिति में विनाशकारी सिद्धि होगी ! इस विषय पर में शाम की प्रार्थना सभ में भी बोलूंगा !पंडित नेहरू प्रार्थना सभा के बाद मुझ से मिलेंगे उनसे भी मैं इस प्रश्न की चर्चा करूँगा ! ३० जनबरी को मालिश के बाद उन्होंने राष्ट्र के नाम अपना अंतिम वसीयत नामाअपने सचिव को दिया और कहा इसे सावधानी से पढलो और कोई बात रह गयी हो तो उसे जोड़ देना ! मेने इसे भारी तनाव  में तैयार किया है !इसी अंतिम वसीयतनामे में गांधीजी ने कांग्रेस को लोकसेवक संघ के रूपमें परिवर्तित करने  के लिए कहा था !उसी दिन प्रार्थना सभा में जाते समय उनकी हत्या कर दी गयी थी !कांग्रेस कार्य समिति ने गांधी जी के अंतिम वसीयत नामे पर विचार कर कांग्रेस को लोकसेवक संघ में बदलने का विचार किया था !किन्तु उस समय की विकराल परिस्थिति को देखते हुए कांग्रेसियों का यह मत था कि कांग्रेस  को भंग करने के बाद इस देश की जिम्मेदारी कौन ग्रहण करेगा ? !गांधीजी यदि जीवित होते तो इसको सम्भाल लेते !जिन लोगों ने गांधीजी की हत्या के लिए माहौल ख़राब किया और गांधीजी की हत्या करुबाई !इसकी कीमत देश को बहुत महँगी  पड़ेगी ! 

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