धर्म में सनातन और सामयिक दो तत्त्व होते हैं ! धर्म का नाम ही धर्म इसीलिए पड़ा क्योंकि वह ईश्वर निर्मित संपूर्ण श्रष्टि को धारण करता है ! इसिलए जोधर्म के सनातन तत्त्वव , सत्य, अस्तेय ,अहिंसा,ब्रह्मचर्य ,अपरिग्रह ,हैं !ये सनातन हैं !इनको क्रिया रूप में उतारने के लिए जिस नीति विधान का निर्माण ,देश ,परिस्थित स्वभाव आदि के अनुसार होता रहता है वह बदलता रहता है ! मानव समाज परस्पर सहयोग से संचालित होता है !और मानव समाज के विवेक पूर्ण सहयोग से पशु ,पक्छी आदि समस्त जीव जंतुओं का संरक्छण होता है !सभी प्राणियों के भोग के लिए ही पृथ्वी ,आकाश ,जल ,अग्नि और वायु का निर्माण हुआ है !इनसे ही प्राणियों के लिए समय और काल भेद से समस्त भोग सामग्री उत्पन होती है ! सभी धर्मों में त्याग को आवश्यक माना गया है !त्याग की इस प्रक्रिया को अनेक नाम दिया गए हैं !बलिदान ,कुर्वानी ,दान ,यज्ञ आदि अनेक नाम देशों अदि की भिन्नता मेंउन देशों में प्रचिलित मान्यताओं के अनुसार त्याग के अनेक नाम है !वैदिक संस्कृति में यज्ञ को त्याग का नाम दिया है !सभी प्राणी संसार में मल मूत्र विसर्जन से जो गन्दगी भूमि पर उत्पन्न कर देते हैं !उसकी शुद्धि के लिए ,और कतिपय दुष्ट मनुष्यो के द्वारा अधिक प्राप्ति के कारणों से जो जल .जंगल ,जमीन ,आदि प्राकृतिक साधनो को दूषित और प्रदूषित किया जाता है ,!जिस से प्रकृति चक्र अवरुद्ध हो जाता है !समय पर वर्षा नहीं होती है ,अकाल ,भूकंप ,आदि और वायु ,जल प्रदुषण आदि के कारण मानव समूह के साथ संपुर्ण प्राणी जगत के सामने असितत्व का संकट उत्पन्न हो जाता है !इसीलिए इस विषम और प्राणान्तक स्थिति से निपटने के लिए मन्त्र आदि के विधि विधान से यज्ञों का आयोजन होता था !अभी भी होता है !इसमें उत्तम सुगन्धित पदार्थों की अग्नि में आहुतियां दी जाती है !इस यज्ञ विद्या को दूषित करने के लिए कुछ धूर्तों ने पशुबलि को भी प्रबेश करा दिया था !जिसका शशक्त प्रतिरोध हुआ और इस दूषित ,हिंसक प्रथा को समाप्त कर दिया !भगवान् श्री कृष्ण ने गीता में यज्ञ का शुद्ध स्वरुप समाज के सामने प्र्रस्तुत किया !और दूध घी के लिए गाय को मान्यता प्रदान कराई और स्वयं गायों को चराया !परिणाम स्वरुप गाय भारतीय अर्थ व्यबस्था की रीढ़ बन गयी !और उसके समस्त अंग हड्डी .चमड़ा ,आदि भी समाज के लिए उपयोगी हो गए !उसके गोबर समस्त प्रकार के जहरीले कीटों का विनाशक और मूत्र समस्त रोगों का नाश करने वाला होता है !तथा गाय के गोबर और मूत्र से उत्तम खाद का निर्माण होता है !करोड़ों की संख्या में गायें भारत में थी !और यहाँ घी दूध की नदियां बहती थी ! मनुष्यों ने समयानुसार अपनी सामर्थ्य ,स्वभाव भिन्नता के कारण धर्म के सम्बन्ध में अनेक धारणाएं उत्पन्न की !भारत में भी वैदिक धर्म में अनेक धारणाएं जैन ,बौद्ध ,सिख आदि के रूप में प्रगट हुई ! कालांतर में इस्लाम और ईसाई धर्म का प्रवेश भी भारत में हुआ !और बहुत से लोगों ने हिन्दू धर्म को त्यागकर इन धर्मों को स्वीकार कर लिया !भारत में इन धर्माबलंबियों की बहुत बड़ी संख्या है !भारत भूमि का एक बहुत बड़ा भू भाग विभाजित होकर पाकिस्तान बन गया जो अब दो भागों में बिभाजित होगया !और एक का नाम बांग्लादेश हो गया !
आज इदुलजुहा मुसलमानो का बहुत बड़ा त्यौहार है !इसमें कुर्बानी दी जाती है !इसमें भारत में लाखों बकरे काटे जाते हैं !कहीं छिपे तौर पर गायों की भी वलि दी जाती हैं !मुस्लिम देशों में भी यह दिन भारत की तरह खुसी का होता है !किन्तु करोड़ों निर्दोष मूक पशुओं के बड़े विनाश का दिन होता है !अब कुछ मुसलमानो ने इस कुर्वानी प्रक्रिया को बदलने का प्रयत्न करना भी शुरू कर दिया है !इस दिन को अहिंसक ,करुणा और दया प्रधान धर्मों को मान ने बाले लोगों को करोङो पशुओं के सामूहिक संघार के लिए ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए !कि परमात्मा इन जीवों की आत्माओं को शांति प्रदान करे !और अल्लाह ताला से यह गुजारिश करनी चाहिए !कि मुसलमानो को इस खूंख्वार क़ुरबानी के बजाय किसी और अहिंसक कुर्बानी का मार्ग बताये !क्योंकि अल्लाह दयावान हैं !तो फिर ये करोङों जीव उसकी दया से वंचित क्यों हैं ?
आज इदुलजुहा मुसलमानो का बहुत बड़ा त्यौहार है !इसमें कुर्बानी दी जाती है !इसमें भारत में लाखों बकरे काटे जाते हैं !कहीं छिपे तौर पर गायों की भी वलि दी जाती हैं !मुस्लिम देशों में भी यह दिन भारत की तरह खुसी का होता है !किन्तु करोड़ों निर्दोष मूक पशुओं के बड़े विनाश का दिन होता है !अब कुछ मुसलमानो ने इस कुर्वानी प्रक्रिया को बदलने का प्रयत्न करना भी शुरू कर दिया है !इस दिन को अहिंसक ,करुणा और दया प्रधान धर्मों को मान ने बाले लोगों को करोङो पशुओं के सामूहिक संघार के लिए ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए !कि परमात्मा इन जीवों की आत्माओं को शांति प्रदान करे !और अल्लाह ताला से यह गुजारिश करनी चाहिए !कि मुसलमानो को इस खूंख्वार क़ुरबानी के बजाय किसी और अहिंसक कुर्बानी का मार्ग बताये !क्योंकि अल्लाह दयावान हैं !तो फिर ये करोङों जीव उसकी दया से वंचित क्यों हैं ?
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