राजनीति और समाज----------- मानव समूहों को व्यबस्थित जीवन जीने के लिए अनेक व्यबस्थायें मानव समाज ने निर्मित की !धर्म ,की व्यबस्था में मनुष्यों के अंतःकरण (मन ,बुद्धि ,चित्त ,अहंकार ) को शुद्ध ,पवित्र बने रहने के लिए करुणा ,प्रेम ,अहिंसा ,सत्य ,अस्तेय ,अपरिग्रह ,ब्रह्मचर्य अदि के विधि विधान निर्मित किये गए !प्राणियों के द्वारा किये गए समस्त कर्म तो शरीरों से होते दिखाई देते हैं ,और उनका अच्छा बुरा परिणाम भी शरीरों पर ही होता है !किन्तु इन सभी कर्मों की अच्छी बुरी प्रेरणा अंतःकरण से ही प्राप्त होती है !अतः धर्म का मुख्य कार्य है अंतःकरण को शुद्ध ,पवित्र रख कर शरीर से उत्तम कर्म कराना !राजनीति शरीर के समस्त कार्यों को बाहर से नियंत्रण करने के लिए बाहर से नियंत्रित करती है ! इसके लिए कानूनों का निर्माण करना ,कानूनों का पालन करने के लिए कार्यपालिका का निर्माण करना ,और तोड़ने वालों के लिए दंड देने के लिए न्याय व्यबस्था को निर्मित करना !इन सब के लिए पूर्वकाल में राजा का निर्माण हुआ था !जो अब समाप्त होकर प्रजातंत्र में परिवर्तित हो गया है ! प्रजातंत्र भी मानव समूह की व्यबस्था करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पा रहा है !इसीलिए अब सभी प्रकार के शासन से रहित व्यबस्था के निर्माण की खोज में कुछ मनीषी लगे हुए हैं ! अभी तो राजनीतिक व्यबस्था देश में स्वार्थ के गहरे गढ़े में तेजी से गिरती दिखाई दे रही है ! राजनीति ने शासन व्यबस्था को पूर्ण रूप से भ्रष्ट कर ही दिया है ! इस से समाज में भी धार्मिक चरित्र निर्माण और बुद्धि को शुद्ध और पवित्र करने की क्रिया भी नष्ट होती दिख रही है !चरित्र निर्माण के दो प्रमुख केंद्र धर्म और शिक्छा दोनों दूषित हो गए है !इन दोनों माध्यमों में अमावस्या के गहन अन्धकार में भी कुछ सत्य ,करुणा ,प्रेम ईश्वर प्रेम से परिपूर्ण स्वार्थ रहित सेवा के केंद्र भी जुगनू के प्रकाश की तरह और कुछ धीर ,वीर ,समाज सेवा को अर्पित युवाओं और व्यक्तियों के भी दर्शन होते हैं ! भारत की पवित्र भूमि में स्त्री पुरुषों में धर्म और सेवा के भाव स्वभाव गत हैं ! बे प्रकाशित नहीं हो पा रहे हैं !इस अवरोध का एक प्रमुख कारण राजनीति है !राजनीति पुरुषों ,महिलाओं ,और युवाओं को भी भ्रष्ट कर रही है !इसने सत्ता और महत्ता की आकांछा इतनी तीव्र कर दी है !कि इसकी प्राप्ति के भेंट समाज से सद्भाव और सेवा भाव नष्ट कर दिया हैं !सिर्फ मुख़ौटे दिखाई देते हैं !यह बीमारी कैंसर और डेंगू से भी अधिक घातक और व्यापक हैं !इसके इलाज के लिए देश में महापुरुषों के महान जीवन परंपरा विद्यमान है !सिर्फ उनका स्मरण और अनुसरण कर व्यक्तिगत जीवन में धारण कर उसको सामाजिक जीवन में प्रवाहित और प्रकाशित करने की आवश्यकता है !यह देश की प्राणशक्ति है !
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