Sunday, 4 September 2016

शिक्छक दिवस -------- देश में शिक्छाविद डॉ राधाकृष्णन की स्मृति में शिक्छक दिवस उनके जन्म दिन ५ सितंबर को मनाया जाता है !इस दिवस पर भारत के राष्ट्रपति योग्य शिक्छकों को सम्मानित भी करते हैं !देश के सभी भागों में इस दिवस पर अवकाश प्राप्त शिक्छकों को खोज कर उनको भी सम्मानित किया जाता है !वेद में शिक्छकों का वर्णन आता है ! शिक्छकों के खास दो गुण होते हैं ---- पथिकृद , विचक्चकणः! पथिकृत यानी पाथ फाइंडर ,रास्ता खोजने वाला !एक बार रास्ता बन जाएगा ,तो फिर सब लोग उस पर चलेंगे  परंतु पहले रास्ता खोजने और बनाने का काम शिक्छकों का है ! मार्ग खोजने वाला कौन बनेगा ? जो विच्छकन होगा वही मार्ग खोजने वाला बन सकेगा ! विचक्छण यानी चरों तरफ देखने वाला ऐसा मनुष्य रास्ता खोजता है और नया रास्ता बनाता है !प्राचीन भारत में इसीलिए शिक्छक गुरु कहलाता था !और वह  अपनी कृति से ही सम्मानित होता था ! भारत की इस ऋषि प्रणीत वेद प्रतिपादित श्रेष्ठ गुरु परंपरा का पालन और निर्वहन भारत को विश्व गुरु की पदवी से विभूषित कर सकता है !किन्तु आधुनिक समय में तो यह स्वर्णिम स्वपन ही दिखाई देता है ! शायद समय बदले और ऐसा दिखे ? यह स्थिति कोई कोरी कल्पना नहीं है !यह भारत में थी !इसीलिए फिर भी हो सकती है !डॉ राधाकृष्णन इसी ऋषि परंपरा के प्रितिनिधि थे !इसीलिए उनका स्मरण राष्ट्रपति के रूप में नहीं शिक्छक के रूप में किया जाता है ! 

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