आपने बहुत उत्तम गीता के श्लोकों का चयन किया है !यद्द्पि यह कहना कठिन है ! कि गीता का कौनसा श्लोक जीवन के लिए उपयोगी नहीं है !सभी महापुरुषोँ और गीता के भाष्यकारों ने अपनी रूचि विश्वास और जन हित को ध्यान में रख कर गीता के श्लोकों का चयन किया है !महान ग्यानी अद्वैत मत के स्थापक शंकराचार्य ने गीताके भक्ति परक श्लोक को गीता सार कहा है ११(५५)आचार्य विनोबा भावे ने ४(१०)को कहा है कि भगवान को कर्म ज्ञान उपासना और मोक्ष के सम्बन्ध में जो कुछ कहना था वह इस श्लोक में कह दिया है !स्वामी रामसुख दास ने कहा है कि ४(२३ )कर्मयोग का मुख्य श्लोक है !गांधी जी गीता के २(५४से७२)के समस्त श्लोकों को कर्म कोष कहते थे !गांधी आश्रम की दैनिक प्राथनाओं में इन श्लोकों का दैनिक सुबह शाम पाठ किया जाता है !रामनुजा चार्य के गुरु यामुनाचार्य ने ७ श्लोकों को छांट कर सप्त श्लोकी गीता लिखी है !इस प्रकार गीता ग्रन्थ से सभी मनुष्योँ की लौकिक पारलौकिक और आध्यात्मिक समस्यायों का जैसा समाधान होता है !वेशा किसी भी धर्म के अन्यग्रंथों से नहीं होता है !यह धर्मग्रन्थ विश्व के सभी आध्यात्मिक व्यक्तियों का नूरे चश्म रहा है !किन्तु हम भारत बासी इतने दुर्भाग्यी है कि इस ग्रन्थ रत्न को विद्यालयोँ में पढ़ाने में गुरेज करते हैं !
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