Saturday, 10 September 2016


आज ऋषि परम्परा को सामाजिक जीवन में प्रवेश करा देने वाले महान ऋषि आचार्य विनोबा भावे का जन्मदिन है !उनकी जीवन साधना अपने नाम धाम को परम शक्ति में बिलीन कर देने की थी !यही ऋषि परंपरा भारत की आध्यात्मिक परंपरा रही है !जिसमे उपनिषद जैसे सूक्छम आध्यात्मिक ज्ञान को विश्व को देने वालों के नाम धाम का सही पता लगा पाना आज भी खोज और शोध का विषय बना हुआ है !भले ही विनोबा का प्रयत्न लोकदृष्टि से बचने का रहा हो !किन्तु गांधी जी जिन्हे राष्ट्र पिता कहा जाता है !और जिनकी पहचान विश्व पटल पर महापुरुषों के महा पुरुषों के रूप में जानी जाती है !उन गांधी जी ने विनोबा को पत्र लिख कर कहा था !कि विनोबा में नित्य प्रति सेकंडों लोगों से मिलता हूँ !किन्तु तुम्हारे जैसी पवित्र आत्मा का दर्शन नहीं होता है ! !लोकप्रतिस्ठा से दूर रहने वाले विनोबा ने इस पत्र को भी रद्दी की टोकरी में फेक दिया था !किन्तु विनोबा का जीवन लोकसेवा का अनूठा उदहारण पेश करता है !इसीलिए उसको कितना भी छिपाया जाय !उसको तो उजागर होना ही पड़ेगा !विनोबा को हम सर्वोदय के जनक के रूप में स्मरण कर सकते हैं !गांधी के निधन के समय सर्वोदय एक बीज रूप मन्त्र के रूप में विद्यमान था ! यह शव्द अभी बहुजन समाज के लिए अपरिचित था ! मार्च १९४८ में जब गांधी जन सेवाग्राम में मिले तब गांधी परिवार को सर्वोदय समाज नाम देने के लिए गांधीजन तैयार नहीं थे ! लोगों का कहना था कि अगर गांधी जनो सर्वोदय समाज नाम दिया जाएगा तो देश का बहु संख्यक समाज इसे समझ नहीं पायेगा ! तब विनोबा कहा अगर इसे गांधी जन अपनी कृति से लोगों के सामने उतारेंगे तो लोग इसे आसानी से समझ जाएंगे ! उन्होंने कहा इसके लिए तपस्या करनी होगी गांधी जी कि यही विरासत है अभी यह विचार बीज रूप में गांधी जी द्वारा बोया गया है ! और वह अंकुरित होकर फूलेगा फलेगा और सारी दुनिया मै फैलेगा हम को अपने चिित के मेल धो डालने होंगे ! हम नए मनुष्य बनेगे ! अहिंसा का संशोधन करेंगे !अपनी आत्मशक्ति का निरीक्छण करेंगे ! विनोबा अब इस मिसन के लिए पूर्ण रूप से समर्पित हो चुके थे !इसिलए घोषणा कर दी की जब तक भूदान यज्ञ का कार्य सिद्ध नहीं होगा तब तक आश्रम का आश्रय भी छोड़ता हूँ ! यह अहिंसक क्रांति का यज्ञ है ! युग पुरुष की मांग है ! मुझे ५ करोड़ एकड़ जमीन चाहिए !विद्वान चाहे मुझे पागल समझें ! मेरे हाथ में रत्न चिंतामणि आगया है ! मुझे एक जीवन कार्य मिल गया है ! अब तक बे अकेले ही थे ! शुरू में देशभर में उनकी अकेले ही यात्रा चलती रही ! परन्तु अद्भुत मस्ती में चलती थी ! बे कहते थे सूर्य अकेला ही चलता है ! बाद में हवा फैलती गयी साथी जुड़ते गए तो कहने लगे अब में शहस्त्रा बाहु बन रहा हूँ !इस तरह गांधी जी के आश्रम का एक अपरिचित आश्रम बासी लोक ह्रदय में प्रेम और आदर का स्थान पाता गया ! विनोबा ने सर्वोदय के मन्त्र को समाज व्यापी बना दिया !और सारे समाज का उत्थान हो ! समाज में नैतिक ताकत का विकास हो ! जनता का सामूहिक गुण विकास हो ! ऐसा एक व्यापक आंदोलन चलाया ! सर्वोदय का दर्शन प्रत्यक्छ व्योहार में प्रितिस्ठित हुआ ! आंदोलन के कुछ साथी थके ! कुछ विचलित हुए ! सर्वोदय का सन्देश पहुंचाने में १२ साल लग गए ! समस्त देश की एक प्रदिक्छ्णा पूरीहुई !तेरह साल तीन महीने तेरह दिन के बाद अपने आश्रम में बापिस पहंचे ! बिनोबा ने कहा था कि विश्व आत्मा और मानव आत्मा जुड़े यह युक्ति ही मुक्ति है !ऐसी खोज में विनोबा जी सारे जीवन लगे रहे !यह गांधी विनोबा की विरासत है !और गांधी जन को तदनुसार जीवन जी कर इसे लोकजीवन में उतारने का काम करना है !

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