Tuesday, 13 September 2016

भाजपा को अब देश का शासन चलने का अवसर प्राप्त हो गया है !इसीलिए अब इसे अपने कार्यकर्ताओं को देश में मौजूद समस्यायों के निराकरण  और समाधान के लिए भगीरथ प्रयत्न करने के लिए जुट जाने के लिए लगा देना  चाहिए !जो इसका प्रबल विरोध सत्ता में बैठी कांग्रेस के प्रति था !अब उस शाब्दिक विरोध में अधिक समय ना बर्बाद कर अपने आचरणों से विरोध प्रस्तुत करना चाहिए !मोदी  जी ने  जिन मुद्दों को जनता के सामने बहुत ताकत के साथ उछाला था ! और सत्ता में आते ही समाधान का  वायदा किया था ! उनमे से सिर्फ एक केंद्र में उनकी सरकार के दौरान कोई घोटाला नहीं हुआ यह पूर्ण रूप से नियंत्रित दिखाई देता है !उनके मंत्रिमंडल में कुछ ईमानदार मंत्री है !किन्तु जो भ्रष्ट हैं उन पर प्रधान मंत्री की पैनी नजर रहती है !इस समय मोदीजी के नियंत्रण में भाजपा का संगठन और शासन प्रशासन है ! दूसरा  अहम् मुद्दा जो महगाई का है !वह सुलझने का बजाय बहुत बढ़ गया है !खाद्य पदार्थों और जनता के दैनिक उपयोग की वस्तुओं में असाधारण बृद्धि हुई है ! बाजार पर सरकार का नियंत्रण दिखाई नहीं दे रहा है !यद्द्पि इसमें केंद्र से अधिक राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है !किन्तु जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें है !वहां भी स्थिति में सुधार नहीं है ! एक समस्या धार्मिक सद्भाव की है ! हिन्दू मुस्लिम समस्या देश की सबसे बड़ी साम्प्रदायिक समस्या है !जिसका समाधान देश के विभाजन और गांधीजी की सहादत के बाद भी नहीं हो सका है ! कश्मीर की समस्या के समाधान के लिए जिस सख्त कदम की आवश्यकता थी !अब उसकी और मोदी सरकार जाती दिख रही है !इस अहम् समस्या के समाधान के समाधान की विफलता के लिए  जनसंघ और अब भाजपा लगातार कांग्रेस की आलोचना करती रही है ! अब सत्ता भाजपा के हाथमें है !इसीलिए अब इस समस्या के समाधान का सार्थक प्रयत्न मोदीजी की सरकार को करना चाहिए !  लोकतंत्र का स्वरुप ही ऐसा है कि इसमें सत्ता में परिवर्तन अवश्य होता है !इसीलिए सत्ता में पकड़ मजबूत करने के लिए और सत्ता में बने रहने के लिए लोकतंत्र को विकृत नहीं करना चाहिए !भाजपा राष्ट्रीय पार्टी है  !इसीलिए इसको नीति आधारित और विचार प्रधान रहना चाहिए !किन्तु यह सत्ता के मोह में दलबदल को प्रोत्साहित कर लोकतंत्र में विचार के स्थान पर अवसरवाद को प्रधानता दे रही है !और दलबदलुओं को बहुत उत्साह के साथ प्रवेश दे रही है !दलबदल को विचार से संयुक्त करने के लिए किसी भी दलबदलू को कम से कम दाल में प्रवेश के बाद  ना दल में और न ही विधान सभा या लोकसभा में जाने के लिए ५ साल तक कोई अवसर नहीं देना चाहिए !ये दलबदलू समर्पित कार्यकर्ताओं का अधिकार छीन  कर  उन्हें हतोत्साहित कर देते हैं ! जिससे विचार विकसित लोकतंत्र की स्थापना नहीं हो पाती है !

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