Sunday, 4 September 2016

कश्मीरी पंडितों के लिए अलग केंद्र शासित राज्य की मांग -------- अपने गृह कश्मीर घाटी से अलगॉव बादी कट्टर पंथी मुसलामानों के कारण १९९६ से दर बदर शरणार्थी के रूप में भटक रहे कश्मीरी पंडितों के लिए प्रथक केंद्र शासित राज्य ही एक मात्र विकल्प है !देश में सुरक्छा के लिए भटक रहे इन कश्मीरी पंडितों को न्याय की आशा दिखाई नहीं दे रही है ! इन्होंने अपनी बहिन बेटियों को जिस तरह से बेइज्जत होते देखा है ,अपनी पुश्तेनी संपत्ति को लुटते और पूजास्थलों को टूटते हुए देखा !और देश से पलायन करना पड़ा इसके बाद इन लोगों को उन्ही क्रूर दानवों के साथ रहने को विवश किया जाय यह तो अन्याय की पराकाष्ठा होगी !इनके साथ घोर अन्याय होता रहा !और राज्य की और केंद्र की सरकार मूक दर्शक बनी रही !इस से बड़ा अन्याय और क्या हो सकता है ? क्या ऐसे नेता विश्वास योग्य हो सकते हैं ? क्या ऐसी शासन व्यबस्था से रक्छा ,सुरक्छा की गारंटी हो सकती है ? जहाँ अलगाव वादी शांति की प्रस्तावना लेकर जाने वाले विपक्छी सांसदों से उनके घर पहुंचने पर भे मिलने से इनकार कर दें !और सारी वेशर्मी को पार करके देश से ये कहा जाय कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है !और उन अलगॉव बादियों से बात की जाय जो अपना आपको भारत का न तो नागरिक मानते है और न संविधान को मानते हैं !  इस स्थिति में पंडितों के सामने दो ही विकल्प हैं यातो बे मुसलमान बन जाएँ या फिर उनको अलग केंद्र शाषित होम लैंड प्रदान कराया जाय !उनको मुसलमान नहीं बनाना चाहिए क्योंकि उन्होंने अन्य कश्मीरियोंकी तरह धर्म परिवर्तन अब तक नहीं किया है !अलग होम लैंड देना सरकार का काम है !जो सरकार  शायद ही करे !लेकिन किसी भी स्थिति में का श्मीरी पंडितों का पुनर्वास इन अलगपबादी कट्टर पंथियों के साथ नहीं होना चाहिए ! 

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