सेवा कार्य या मालाजप ---- गांधीजी ----हरिजनसेवक१७--२--१९४६
प्रश्न -------- सेवाकार्य के कठिन अवसरों पर भगवद भक्ति के नित्य नियम नहीं निभ पाते हैं ,तो क्या इसमें कोई हर्ज है ? दोनों में से किस कोप्रधानता दी जाए ,सेवा कार्य को अथवा जप को ?
उत्तर ------- कठिन सेवा कार्य हो या उस से भी कठिन अवसर हो ,तो भी भगवद्भक्ति यानी राम नाम बंद हो ही नहीं सकता है !उसका बाह्य रूप प्रसंग के मुताबिक बदलता रहेगा !माला छूटने से जो रामनाम ह्रदय में अंकित हो चुका है ,थोड़े ही छूट सकता है !
गांधीजी जो कहते थे ! वही करते भी थे !उनके जीवन में सर्वाधिक कठिन प्रसंग १९४४ से १९४८ तक उनके जीवन के अंतिम दिन ३० जनवरी तक रहे !किन्तु उन्होंने राम नाम को नहीं छोड़ा ! १९४६ में नोआखाली में हिन्दू मुस्लिम दंगा भड़क उठा !नोआखाली में जो अब बंगला देश में है ! ८२% फीसदी मुस्लिमों की आबादी थी !१८% हिन्दू थे !वहां हिंदुओं का व्यापक कत्ले आम हुआ था !उस समय बंगाल में मुस्लिम लीग की सरकार थी !सुहरावर्दी मुख्यमंत्री थे ! उन्होंने खुद हिंदुओं को क़त्ल करने की खुली छूट दी थी ! गांधीजी ने वहां१०४ डिग्री बुखार में ११६ मील की पैदल यात्रा बिना चप्पल पहने की थी ! बे सायं और प्रातः प्रार्थना करते थे !उनकी प्रार्थना सर्वधर्मों के उत्तम अहिंसक भजनों से होती थी ! उस प्रार्थना में कुरान की आयतें भी होती थी !और उनके भजन के एक अंश में ईश्वर अल्ला तेरे नाम भी शामिल था !और राम रहीम तथा कृष्णा करीम भी सम्मिलित था !वहां कट्टर पंथी मुसलमान ,मुल्ला ,मौलवी उनको कृष्ण ,करीम और ईश्वर अल्लाह नहीं कहने देते थे !बे कहते थे बूढ़े अगर तू यह प्रार्थना करेगा तो तेरे टुकड़े टुकड़े कर देंगे !तू राम ,कृष्ण के साथ अल्लाह और रहमान रहीम को जोड़ता है !किन्तु गांधीजी अविचिलित होकर प्रार्थना करते रहे !और शांति स्थापित करने में भी कामयाब हुए थे !१९४८ में दिल्ली में उनकी प्रार्थना सभा में भी कट्टर पंथी हिन्दू उनको कुरान की आयतें नहीं पढ़ने देते थे !प्रार्थना सभा को भंग करने की कुचेस्टा करते थे !किन्तु वहां भी गांधीजी अविचिलित रहे !२० जनबरी १९४८ को उनकी प्रार्थना सभा में बम बिस्फोट किया गया था !जिसमें गांधीजी बाल ,बाल बच गए थे !सरदार पटेल ने इस घटना के बाद गांधीजी की सुरक्छा के लिए सादी ड्रेस में पुलिस तैनात कर दी थी !जब गांधीजी को यह पता चला तो उन्होंने पटेल से कहा था !तुम यह सुरक्छा बापिस करो !मेरी रक्छा राम करेंगे !स्वतंत्र भारत में मेँ पुलिस की रक्छा में नहीं रहूँगा !उन्होंने मरना स्वीकार किया था किन्तु राम को छोड़ना स्वीकार नहीं किया था !
प्रश्न -------- सेवाकार्य के कठिन अवसरों पर भगवद भक्ति के नित्य नियम नहीं निभ पाते हैं ,तो क्या इसमें कोई हर्ज है ? दोनों में से किस कोप्रधानता दी जाए ,सेवा कार्य को अथवा जप को ?
उत्तर ------- कठिन सेवा कार्य हो या उस से भी कठिन अवसर हो ,तो भी भगवद्भक्ति यानी राम नाम बंद हो ही नहीं सकता है !उसका बाह्य रूप प्रसंग के मुताबिक बदलता रहेगा !माला छूटने से जो रामनाम ह्रदय में अंकित हो चुका है ,थोड़े ही छूट सकता है !
गांधीजी जो कहते थे ! वही करते भी थे !उनके जीवन में सर्वाधिक कठिन प्रसंग १९४४ से १९४८ तक उनके जीवन के अंतिम दिन ३० जनवरी तक रहे !किन्तु उन्होंने राम नाम को नहीं छोड़ा ! १९४६ में नोआखाली में हिन्दू मुस्लिम दंगा भड़क उठा !नोआखाली में जो अब बंगला देश में है ! ८२% फीसदी मुस्लिमों की आबादी थी !१८% हिन्दू थे !वहां हिंदुओं का व्यापक कत्ले आम हुआ था !उस समय बंगाल में मुस्लिम लीग की सरकार थी !सुहरावर्दी मुख्यमंत्री थे ! उन्होंने खुद हिंदुओं को क़त्ल करने की खुली छूट दी थी ! गांधीजी ने वहां१०४ डिग्री बुखार में ११६ मील की पैदल यात्रा बिना चप्पल पहने की थी ! बे सायं और प्रातः प्रार्थना करते थे !उनकी प्रार्थना सर्वधर्मों के उत्तम अहिंसक भजनों से होती थी ! उस प्रार्थना में कुरान की आयतें भी होती थी !और उनके भजन के एक अंश में ईश्वर अल्ला तेरे नाम भी शामिल था !और राम रहीम तथा कृष्णा करीम भी सम्मिलित था !वहां कट्टर पंथी मुसलमान ,मुल्ला ,मौलवी उनको कृष्ण ,करीम और ईश्वर अल्लाह नहीं कहने देते थे !बे कहते थे बूढ़े अगर तू यह प्रार्थना करेगा तो तेरे टुकड़े टुकड़े कर देंगे !तू राम ,कृष्ण के साथ अल्लाह और रहमान रहीम को जोड़ता है !किन्तु गांधीजी अविचिलित होकर प्रार्थना करते रहे !और शांति स्थापित करने में भी कामयाब हुए थे !१९४८ में दिल्ली में उनकी प्रार्थना सभा में भी कट्टर पंथी हिन्दू उनको कुरान की आयतें नहीं पढ़ने देते थे !प्रार्थना सभा को भंग करने की कुचेस्टा करते थे !किन्तु वहां भी गांधीजी अविचिलित रहे !२० जनबरी १९४८ को उनकी प्रार्थना सभा में बम बिस्फोट किया गया था !जिसमें गांधीजी बाल ,बाल बच गए थे !सरदार पटेल ने इस घटना के बाद गांधीजी की सुरक्छा के लिए सादी ड्रेस में पुलिस तैनात कर दी थी !जब गांधीजी को यह पता चला तो उन्होंने पटेल से कहा था !तुम यह सुरक्छा बापिस करो !मेरी रक्छा राम करेंगे !स्वतंत्र भारत में मेँ पुलिस की रक्छा में नहीं रहूँगा !उन्होंने मरना स्वीकार किया था किन्तु राम को छोड़ना स्वीकार नहीं किया था !
No comments:
Post a Comment