गांधीजी और रामनाम --------गांधीजी को बचपन में भूत प्रेतों से डर लगता था !इसीलिए बचपन में इस डर से निवृत्ति के लिए उन्होंने राम का जप शुरू कर दिया था !इस मन्त्र को देने वाली उनकी धाय रम्भा थी !फिर यह राम नाम उनके जीवन का शक्ति शाली और सर्वश्रेष्ठ आधार बन गया था !एक सत्याग्रही या ऐसे व्यक्ति के नाते जो दिन रात के २४ घंटे सत्य या ईश्वर में अटल श्रद्धा रखता था, .गांधीजी ने यह समझ लिया था कि ईश्वर ही हर कठिनाई में फिर वह चाहे ,शरीररिक हो या मानसिक हो या आध्यात्मिक हो उन्हें हमेशा सांत्वना और सामर्थ्य तथा आश्रय देता है !इस सम्बन्ध में उनकी सर्व प्रथम परीक्छा ब्रह्मचर्य के पालन में हुई थी !गाँधी जी कहते थे कि अपवित्र विचारों को रोकने में राम नाम ने उनकी सबसे ज्यादा सहायता की थी !रामनाम ने ही उनको उपबास करने की शक्ति प्रदान की !रामनाम ने ही उन्हें सारे आत्म संघर्षों में विजय दिलाई थी, जो उन्हें राजनीतिक ,सामाजिक आर्थिक और धार्मिक छेत्रों में लड़नी पडी थी !अपने आपको ईश्वर के आश्रय में छोड़ने से उन्हें यह अनुभव भी प्राप्त हुआ कि राम नाम शारीरिक व्याधियों का भी इलाज है ! सत्य की खोज करने और मनुष्यों के रोगों की निबृत्ति की उत्कट इक्छा के कारण गांधीजी ने शुद्ध हवा ,मालिश ,कई तरह के स्नानों ,उपवासों ,योग्य आहारों ,मिटटी की पट्टी और ऐसे ही दूसरे साधनों के द्वारा रोग मिटाने के सादे और सस्ते तरीके खोज निकाले थे !मनुष्य सिर्फ शरीर ही नहीं है ,बल्कि और कुछ भी है !इसीलिए गाँधी जी का यह पक्का विश्वास था कि मनुष्य के रोगों का कारण सिर्फ शारीरिक ही नहीं है !शरीर के साथ रोगी के मन और आत्मा का भी इलाज आवश्यक है !गांधीजी ने अनुभव किया इस ध्येय को प्राप्त करने के लिए राम नाम में श्रद्धा और विश्वास रखने जैसी उपयोगी और कोई औषधि नहीं है !गांधीजी का विश्वास था कि जब व्यक्ति अपने आपको पूरी तरह ईश्वर के हांथों में सौंप देता है, और भोजन ,व्यक्तिगत सफाई और आमतौर पर अपने आपको काम क्रोध आदि ,विकारों को जीतने के बारे में और समस्त प्राणियों के साथ अपने संबंधों के बारे में ईश्वर के नियमों का पालन करता है ! तो वह रोग से मुक्त रहता है !यह स्थिति प्राप्त करने के लिए बे स्वयं भी प्रयत्न शील रहते थे! १९४४ में जेल से छूटने के बाद उन्होंने पुणे के पास उरलीकांचन में उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र स्थापित किया था !जहाँ खुद उनके द्वारा आचरण में उतारे हुए प्राकृतिक इलाज के साथ रोगियों को राम नाम की महत्ता भी बताई जाती थी !यह प्राकृतिक चिकित्सा आज भी वहां हो रही है !गांधीजी की राम नाम में आस्था और श्रद्धा इतनी दृढ थी !कि म्रत्यु के समय उनके मुख से अंतिम शव्द हे राम ही निकले थे !राजघाट पर उनकी समाधी पर हे राम ही अंकित है !राम भक्त अहिंसक ,सत्यनिष्ठ ,प्राणिमात्र की सेवा में निष्काम भाव से समर्पित गाँधी जी की हत्या भी एक पागल तथाकथित नकली बुजदिल राष्ट्र भक्त हिन्दू ने की थी ! आज भी ऐसे तमाम हिन्दू धर्म के नकली ,फर्जी और , हिन्दू धर्म के कलंक राक्छ्सी ,आसुरी वृत्ति के रावण और कंस के अवतार हिन्दू गाँधी जी को नकली फर्जी झठे
मनगढंत किस्से कहानिया गढ़ कर गाँधी जी को बदनाम करने के प्रयत्न में संलग्न है !इन लोकतंत्र विघातक तत्त्वों से हिंदुओं को सतर्क और सावधान रहना चाहिए ! ये राम भक्त नहीं काम भक्त हैं !
मनगढंत किस्से कहानिया गढ़ कर गाँधी जी को बदनाम करने के प्रयत्न में संलग्न है !इन लोकतंत्र विघातक तत्त्वों से हिंदुओं को सतर्क और सावधान रहना चाहिए ! ये राम भक्त नहीं काम भक्त हैं !
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