भारत की पवित्र भूमि की विरासत ऋषियों ,महर्षियों ,अवतारों ,त्यागियों और तापसियों की रही है !इस भूमि पर इन महापुरुषों ने जो किया वह स्वयं प्रकाशित हुआ था !अनादि काल से आचरित यह श्रेष्ठ जीवन पद्धति समय ( काल ) के उलटफेर से क्रमशः पतित होकर नष्ट प्रायः हो गयी ! गुलामी के १००० साल ने इन श्रेष्ठ संस्कृति को बहुत अधिक नुकसान पहुँचाया !इसको गुलामी से मुक्ति के लिए ऋषियों ,महर्षियों की तपः साधना और साधु संतो की त्याग तपस्या ने अद्र्श्य ईश्वरी शक्ति का आवाहन कर स्थूल दृष्टि से आजादी के लिए सर्वस्व अर्पण करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने प्रयत्न किया और देश को स्वतंत्र कराया ! किन्तु स्वतंत्र भारत में १००० सालों की परतंत्रता के कारण भारतीय अभी भी दिमागी गुलामी से आजाद नहीं हो पाये हैं ! इसीलिए इस विशाल देश भारत की विरासत अभी भी निकृष्ट स्वार्थ और भौतिक सुखों की चाह के गहन अन्धकार से आच्छादित है !हमारे सद्वाक्यों का खोखलापन हमारे अनुशासन रहित ,निम्न स्वार्थों से युक्त और कुत्तों की तरह भोग और ऐश्वर्य के पदार्थों की प्राप्ति के प्रयत्नों में प्रतिदिन प्रकाशित होते रहते हैं !हमारे जीवन की पतवार अत्यंत पशुबत निकृष्ट सोच ने पकड़ रखी है ! अब कौन किसको सत्य का मार्ग दिखाये! आदर्श वाक्य सिर्फ कहने के लिए और पशुओं से भी निकृष्ट आचरण करने के लिए है !यही हम देख रहे हैं !और जाने अनजाने ,वश और परवश होकर इसी मार्ग पर हम तेजी से चल भी रहे हैं !
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