पंचायत राज्य आया किन्तु ग्राम स्वराज्य की स्थापना नही हुई --------- स्वतंत्रता के बाद जब संविधान का निर्माण हुआ ,उस समय संसद और विधानसभाओं में अत्यंत उत्कृष्ट देशभक्त नेता लोग जनप्रितिनिधि के रूप में चुनकर पहुंचे थे !उस समय सांसदों और विधायकों को कोई वेतन नहीं मिलता था !जब सत्र चलता था !तब दैनिक भत्ता मिलता था !उन सांसदों ने इस बात को जोर शोर से संसद में उठाया कि गांव के लिए योजनायें गांव में गांव के लोगों के द्वारा बनाई जानी चाहिए !परिणाम स्वरुप राजीब गाँधी ने पंचायती राज देश में लागू किया और युवाओं को भी मताधिकार प्रदान किया !किन्तु पंचायती राज से ग्राम स्वराज नहीं हुआ ! पंचायती राज का लक्छ्य है सत्ता का विकेन्द्रीकरण !केंद्र की सत्ता का कुछ अंश राज्यों में आया और कुछ हिस्सा जिलों और गांव में आया !यह सभी जानता हैं कि पत्थर के कितने भी टुकड़े किये जायें ,बे टुकड़े ही रहेंगे ,मक्खन नहीं बनेंगे !इसिलए जो सत्ता प्राप्त की ललक ,और सत्ता में बने रहने के लिए जो झगड़े ,और गलत काम (मतदाताओं को लालच देना ,रुपये बांटना ,जाति बाद को उभड़ना ,बेईमानी से धनसंचय करना ,झूठ बोलना ,गुंडों और दबंगों की मदद से बूथ केप्चर करना ,समाज को दलितों ,पिछड़ों ,अगड़ों ,अल्पसंख्यकों ,आदि में बाँट कर वोट प्राप्त करना ,धार्मिक उन्माद आदि उत्पन्न करना ) संसद और विधान सभाओं आदि में चुने जाने के लिए जो नेता लोग करते हैं ,बे सबके सब ग्राम पंचायत के चुनावों में भी प्रवेश कर गये ! इसको विनोबा जी मत्सर का राष्ट्रीय करण कहते थे !इस प्रकार जो ग्रामपंचायतें बनी और उनमें जो ग्राम प्रधान आदि चुन कर पहुंचते हैं या जिलापंचायतों ,या ब्लॉकप्रमुख आदि चुने जाते हैं ,बे अपने निम्न सत्ता भोग के स्वार्थों की पूर्ति में संलग्न रहते हैं ,गांव की सेवा नहीं करते हैं !चुनाव जीतने के लिए धनबल और जनबल का प्रयोग करते हैं !चुने जाने पर धन कमाते हैं और दबंगों का निर्माण करते हैं !जो अधिकार प्राथमिक पाठशालाओं के नियंत्रण के ,बालकों को मध्यान्ह भोजन आदि के ग्राम पंचायतों को दिया गया हैं !और जो भी धनराशि ग्रामविकास के लिए ग्रामों में या जिलों में आती है !उसका बन्दर बाँट राज्य कर्मचारियों और प्रधानों या जिला पंचायत अध्यक्छओं में हो जाता है !ग्रामविकास के कार्य ( सड़कनिर्माण ,भवन ,निर्माण ,मनरेगा आदि ) नहीं होते हैं !ग्रामपंचायतों की स्थापना और उनको आर्थिक अधिकार देने के कारण ग्रामस्वराज्य के बजाय ग्रामविनश हो गया है! गांव वैमनस्यता ,और हिंसा तांडव के केंद्र बन गये हैं
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