जैसे कोयले को सफ़ेद नहीं किया जा सकता है ,बैसे ही धन को भी सफ़ेद नहीं किया जा सकता है !कोयला लकड़ी को जलने से ही प्राप्त होता है !या जली हुई जमीन में विशेष छेत्रों में मिलता है ,इसका प्रयोग भी आग लगाने के लिए ही होता है !इसका उपयोग रचनात्मक और विध्वंसक दोनों प्रकार से हो सकताहै !इस से घर भी फूंके जा सकते हैं और भोजन भी पकाया जा सकता है ! इसी प्रकार इस कागजी नोट से लोक व्योहार को रचनात्मक दृष्टि से भी व्यबस्थित ढंग से चलाया जा सकता है !और लोकव्यकस्था भंग भी की जा सकती है कुछः समय से यह कागजी नोट लोकव्यबस्था को नष्ट करने में प्रयुक्त हो रहा था !इसका अनुचित प्रयोग ,भारत का प्रमुख दुश्मन पाकिस्तान फर्जी जाली नोट छापकर और भारत में पड़े पैमाने पर बांटकर हिंदुस्तान की आतंरिक और बाह्य सुरक्छा को खतरा पहुंचा रहा था !इस से भारत की अर्थ व्यबस्था पर भी गंभीर खतरा उत्पन होता जा रहा था ! जो असली नोट एक हजार और पांचसौ के थे ,बे अधिकाँश भारत के भ्रष्ट लोगों के पास संग्रहीत थे !ये लोग देश के चरित्र से नैतिकता को नष्ट कर रहे थे ! इसिलए यह धन काला कहलाने लगा है !इस पर अंकुश लगाना आवश्यक हो गया था ! इसीलिए भारत सरकार ने इन नोटों के प्रचलन को समाप्त करने का निर्णय लिया ! इस निर्णय के पीछे सरकार का राजनैतिक लाभ लेने की इक्छा की बात बहुत से लोग कह रहे है ! उनका कहना है !कि जिनके पास वास्तव में काला धन है !उनको इसकी जानकारी पहले हे दे दी गयी थी ,इसीलिए उन्होंने पहले ही कालेधन को स्वर्ण आदि खरीद कर सफ़ेद कर लिया था !इसका खामयाजा और परेशानी आम जनता को उठानी पड़ रही है ! इसकी तथ्य पूर्ण जानकारी तो संसद के शीतकालीन सत्र में होगी जब विरोधी दल के नेता इस निर्णय के विरोध में अपने वक्तव्य देंगे !फिलहाल तो बैंकों में जो भीड़ देखी जा रही है ,उसमें बो लोग नहीं दिखाई दे रहे हैं ,जिनके पास इस काले धन का जखीरा संग्रहीत है !सरकार का यह कहना कि इस से भ्रष्टाचार समाप्त होगा !यह बात बिलकुल असम्भव है !भ्रष्टाचार तो इन नोटों के कारण भी हो रहा है !लोग धड्ड्ले से एक हजार और पांचसौ के नोट आधे या पौनी कीमत देकर बदल रहे हैं !
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