आज गुरु नानक देव का जन्मदिन है !जिस समय नानक देव का जन्म हुआ देश में इस्लामी हुकूमत थी !नानकदेव ने भारत की अनादी वैदिक धर्म की सनातन संस्कृति के द्वारा सर्वधर्म सद्भाव का प्रचार और प्रसार किया !इस पवित्र भूमि भारत में संतो की अविरल धारा अहिंसा प्रधान ,करुणा युक्त त्याग और तपस्या से अनुप्रेरित और प्रवाहित रही !संतों के सद प्रयत्न हिंसक और आक्रमणकारी आयातित धर्मों के कारण पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सके !फिर भी संतो का अनुबरत प्रयास सर्वधर्म सद्भाव और अहिंसा का ही रहा !इस प्रयास में अनेक संतों को अपना जीवन तक अर्पित करना पड़ा !नानकदेव परंपरा के ही गुरु तेगबहादुर को मुगलिया सल्तनत ने धर्म परिवर्तन स्वीकार ना करने वाले कश्मीरी पंडितों की रक्छा के लिए अपने जीवन की कुर्वानी देनी पड़ी !गुरु गोविन्द सिंह को हिन्दू धर्म की रक्छा के लिए अपने पुत्रों को जिन्दा दीवाल में मुगलिया सल्तनत द्वारा चुनवाये जाने का ह्रदय विदारक दंश झेलना पड़ा !उन्होंने इस कट्टरता के प्रतिकार के लिए सिख धर्म की स्थापना की !और तपस्या से अर्जित ईश्वरीय शक्ति से वैदिक धर्म की रक्छा करते हुए अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया था ! ऐसी यह सनातन धर्म परंपरा से पवित्र भारत भूमि परिपूर्ण रही है ! जिस प्रकार खेत की फसल जंगली जानवर ना खा पायें इसीलिए बाढ़ लगानी पड़ती है ,और कष्ट से उपार्जित धन ,संपत्ति की रक्छा के लिए ताला लगाना पड़ता है ,उसी प्रकार से सिख धर्मगुरुओं ने वैदिक धर्म की रक्छा सुरक्छा के लिए नानक देव का अहिंसात्मक करुणा प्रधान सर्वधर्म सद्भाव का सन्देश भारत भूमि से अखिल विश्व को दिया !इस सनातन वैदिक धर्म की अविरल धारा प्रवाहित होती रहे इसके लिए गुरु गोविन्द सिंह ने शौर्य ,साहस और अस्त्र ,शस्त्र से युक्त सिख धर्म की स्थापना की और धर्म की रक्छा के लिए कुर्वानी का सन्देश दिया !जिस तरह से आकाश में पंछी दो पंखों से युक्त होकर उड़ते हैं !उसी प्रकार से वैदिक धर्म की रक्छा के लिए गुरुनानक देव और गुरु गोविन्द सिंह ने शांति और शौर्य के दो पंखों से रक्छा ,सुरक्छा का सन्देश प्रसारित किया !
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